हिन्दी हाइकु(HINDI HAIKU)-'हाइकु कविताओं की वेब पत्रिका'-2010 से प्रकाशित हो रही है। आपकी हाइकु कविताओं का स्वागत है !

1779

1779

शकुन्तला पालीवाल 1 अक्स प्रभु का छिपा माँ के अंदर सम्मान करो। 2 भीगी पलकें कभी न रहे माँ की, रहे खुश वो। 3 जीवन मेरा कभी लगे पहेली कभी सहेली। 4 जीत उसकी थपेड़ों में टिका जो आगे बढ़ा वो । 5 अनकही हैं सैंकड़ों बातें ऐसी अब कहूँ वो । 6 ये लगे […]

Continue reading
1778

1778

1–फ़ौजी –किसान-डॉ. जेन्नी शबनम  1. कर्म पे डटा कभी नही थकता फ़ौजी किसान।  2. किसान हारे ख़ुदकुशी करते, बेबस सारे।  3. सत्ता बेशर्म राजनीति करती, मरे किसान।  4. बिकता मोल पसीना अनमोल, भूखा किसान।  5. कोई न सुने किससे कहे हाल डरे किसान।  6. भूखा– लाचार उपजाता अनाज न्यारा किसान।  7.  माटी का  पूत माटी […]

Continue reading
1777

1777

1-प्रियंका गुप्ता 1 सूखी धरती दहकता गगन तेरे ही कर्म ।  2 मन जो तपे प्रेम के छींटे मार भीग जाएगा ।  3 नारी का मन तूने जाना ही नहीं रहा अज्ञानी ।  4 मिला न प्रेम खोजते उम्र झरी कस्तूरी बनी ।  5 उँगली थाम चलना था सिखाया भूला वो अब ।  -0- 2-पुष्पा […]

Continue reading
1776

1776

भावना सक्सैना 1 उगले आग रोष में है प्रकृति मानव जाग। 2 मेघ -सा छाया धरती पे कुहासा सँभल ज़रा सा। 3 यह क्या किया? सूखे नदी- जंगल दहकी धरा। 4 रोपे न वृक्ष बिगड़ा संतुलन घुटा है दम। 5 जल क्यों व्यर्थ हर बूंद लिए है अपना अर्थ। 

Continue reading
1775

1775

1-रमेश कुमार सोनी 1 प्रकृति रूप ऋतु वेश संवारें जीवन न्यारे  । 2 वट की लटें धरा छूने निकले बच्चों के झूले । 3 जंगल घने चुनौती देते खड़े घुसो तो जानें । 4 वन की भाषा पशु – पक्षी बोलते हम ही भूले । 5 गाँव निगले कंक्रीट– अजगर बने शहर -0-बसना , छत्तीसगढ़ […]

Continue reading
1774

1774

1-विभा रश्मि 1 बरखा बूँदें  गुदगुदातीं मन  ग़ज़ब फ़न । 2 लय ताल से  रिमझिम बरसीं हरस मन। 3 पंख झाड़ता  बाल्कोनी में परिन्दा  बैठा  अल्गनी । 4 नन्ही ने देखी   बरसात पहली, बूँदों से खेली ।  5  नीड़ों में बैठे   चूज़े रूठे ठुनके   भीगे माँ संग । 6 रेत ने पी ली  ओक […]

Continue reading
1773

1773

भावना सक्सैना 1 भीग जो आई सुबह सुनहरी हर्षा गगन। 2 बरखा बूँदें लाई नवजीवन शांत तपन। 3 दो बूँद जल उठी सौंधी महक थी तप्त धरा। 4 खोह से खींच  लाई बरखा रानी आँखों में पानी। 5 रूह में बसी यादें कुछ पुरानी जिंदा कहानी। 6 दिल के जख्म अपनों की निशानी प्रीत निभानी। […]

Continue reading
1772

1772

विभा रश्मि  1 दोपहरिया – चुभती लू की फाँसें सुलगी साँसें। 2 ग्रीष्म नौतपा  उमसा चप्पा – चप्पा  तड़की धरा ।  3 गर्मी राक्षसी जिह्वा लपलपाती ज्वाला उगले । 4 नद मुहाने   कटे हैं वन घने  थार  बनेंगे । 5  झेलता वार   करुण है चीत्कार   मौनी पादप ।  6 अकाल – छाया मनु व्यस्त […]

Continue reading
1771

1771

1- सत्या शर्मा ‘ कीर्ति ‘ 1 गुज़रे पल उग आती झुर्रियाँ उम्र डाली पे  । 2 दौड़ता अश्व जीवन पथ पर मन सारथी । 3 पूछते बच्चे– आँगन औ तुलसी मिलते कहाँ ? 4 दिन गौरैया चुगती जाती दानें उम्र– खेत के । 5 नए सृजन रचे परमेश्वर धरा चाक पे । 6 हमारा […]

Continue reading
1770

1770

1-डॉ. सुषमा गुप्ता 1 कड़वी बात दे मन पर घाव कभी न भरे। 2 कभी तो लौट देख आकर ज़रा वहीं है खड़े । 3 नि;शब्द खड़ी तारों में ढूँढती हूँ कहाँ हो तुम ! -0- 2-लता अग्रवाल 1 वनवास है  पत्थर की अहल्या परिहास है। 2 पूजे प्रतिमा माने नहीं इंसान करे अजान 3 […]

Continue reading
1769

1769

[ आज डॉ सुधा गुप्ता जी का जन्म दिन है। आज वे कर्मशील जीवन के 83 वर्ष पूरे करके 84वें वर्ष में प्रवेश कर रही हैं।हाइकु-ताँका सेदोका-चोका और हाइबन के क्षेत्र में वे अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुकी हैं।समूचे हिन्दी -जगत को आपकी प्रतिभा और कर्मठता पर गर्व है।पूरा हाइकु परिवार आपके शतायु होने की […]

Continue reading
1768

1768

माँ 1-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ 1 ईश्वर कहे- मुझसे ज़्यादा दर्द सिर्फ़ माँ सहे। 2 माँ को सताना इसी जन्म में तय नरक पाना। 3 बेटी का मान सबसे बड़ी पूजा जीवन-स्वर्ग। 4 वासना- कोढ़ छल की ओट में तू इसे न ओढ़। -0- 2- पुष्पा मेहरा 1 घर-आँगन माँ देती है रोशनी मोमबत्ती -सी  । […]

Continue reading
1767

1767

1-सत्या शर्मा ‘कीर्ति ‘ 1 टपकी बूँदे हर प्यासी आँखों से वर्षा तू कहाँ ? 2 बूँद- बूँद सा फिसलता विश्वास जल अभाव । 3 सूखी ये आँखें धरती है उदास इंद्र नाराज । 4 चिलचिलाती जीवन की ये धूप नेह-जल दो ! 5 बहे नदियाँ बस कागजों पर प्यासा है मन । 6 नदी- […]

Continue reading
1766

1766

2-डॉ सुरेन्द्र वर्मा  1 भूखे को रोटी  नंगे तन कपड़ा  हरि शृंगार  2 रास्ते में खड़े  न हों दरकिनार  चाहते प्यार  3 आपकी बातें  थोड़ी सी हाँ, थोड़ी ना  भ्रम-विभ्रम  4 नन्हा- सा शिशु  होठों पे स्मित हास्य  हाइकु लास्य  5 खाली गागर  प्यासा ही लौट गया  अतृप्त मन  6 कोई बताए  कहाँ छिपा है […]

Continue reading
1765

1765

डॉ.जेन्नी शबनम 1 किरणें आईं खेतों को यूँ जगाए जैसे हो माई।  2 सूरज जागा पेड़ पौधे मुस्काए खिलखिलाए।  3 झुलसा खेत उड़ गई चिरैया दाना न पानी।  4 दुआ माँगता  थका हारा किसान नभ ताकता।  5 जादुई रूप चहूँ ओर बिखरा आँखों में भरो।  6 आसमाँ रोया खेतिहर किसान संग में रोए।  7 पेड़ […]

Continue reading
1764

1764

1-सुदर्शन रत्नाकर 1       भोर की बेला यात्रा पर निकला सूर्य अकेला। 2 सोती है रात चमकता है चाँद देता पहरा। 3 ढूँढती रही खुशियाँ दिन-रात देखा न मन। 4      गले लगाया तरु ने वल्लरी को दिया सहारा। 5 उलझी रही काँटों की दुनिया में फूल देखे न। -0-  2- सुशीला शिवराण 1 बजें घुँघरू मंदिर […]

Continue reading
1763

1763

1- विभा रश्मि 1 माँ की ममता शिशु का अधिकार  निःस्वार्थ  प्यार । 2 माँ की आँखों से टपके जब आँसू  ईश्वर रोया । 3 लोरी गाकर सुलाती माँ ललना  बाँहें पलना । 4 रेशमी डोरी मीठी सुनाती लोरी  झूला झुलाके । 5 मैया दुलारी  चंदा -सी है बिटिया  फुर्र ज्यों चिया । 6 मेरी […]

Continue reading
1762

1762

1-ज्योत्स्ना प्रदीप 2-कृष्णा वर्मा 1 झूठा छलावा मज़दूर दिवस निरा दिखावा। 2 स्वेद बहाऊँ हक हलाल की मैं रोटी कमाऊँ। 3 राम अनोखा केवल श्रम लिखा भाग्य की रेखा। 4 किले बनाता सोता खुद झुग्गी में हँसता-गाता। 5 करे निहाल बनाके कोठी ख़ुद है खस्ता हाल। 6 करो जतन श्रमिकों के बच्चे भी देखें सपन। […]

Continue reading
1761

1761

1-अनिता मण्डा 1 बैठा परिंदा नेह से झुकी शाख़ हर्ष अपार ! 2 जेठ निर्दय झुलसाये बदन रूठी पवन 3 अश्वमेघ को छोड़े धूप का घोड़ा जेठ निगोड़ा। 4 खिलखिलाया रजत-वर्ण पुष्प बाँटे सुगंध 5 काँटों में खिले नागफ़नी का फूल चुभन भूल। !! 6. फूल-कलियाँ सजाये डालियों ने मन मोहने । 7 देख मुस्कान […]

Continue reading
1760

1760

1-प्रीति सुराना 1 बने घरौंदा- तिनके जुड़कर, अकेले हम। 2 बरसा पानी- बह गई फसलें, भूखी धरती। 3 खुली दरारें- सूखी धरती पर, फटी एड़ियाँ। 4 सूखी टहनी, पतझड़ ऋतु में- भटके पंछी। 5 अकाल मृत्यु, छाया धरती पर- जल–संकट। 6 नई किरण, मेहनत की बेला- भोर हो गई। 7 घना अँधेरा, अब डरना कैसा- […]

Continue reading