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सतोषर समाज कल्याण दोहा कतार सम्पुर्ण ग्राम बसि मे हार्दिक अपिल  करहल छि। कि सतोषर धाम मे रहल shree ram janki high school के प्राङ्गण मे सरस्वती जि के मनदिर निर्माण भरहल छै।  देश बिदेश  मे रहबला सम्पुर्ण ग्राम बासी जे कोनो देश मे छि  सब कोयस  सहयोग कर के लेल  अनुरोध करै छि।  सहयोग कैनिहार सब कोय के  चंदा दाता मे मंदिर मे नाम लिखल जाइत। बिदेश मे कतै रहा बला प्रबासी अपना ईच्छा अनुसार सहयोग कसकै छि।साउदि मे दिपेन्द्र प्रसाद यादव मोबाइल 0598995130 कतार मे मनिष राय । जय मिथिला।।

सतोषर समाज कल्याण दोहा कतार सम्पुर्ण ग्राम बसि मे हार्दिक अपिल करहल छि। कि सतोषर धाम मे रहल shree ram janki high school के प्राङ्गण मे सरस्वती जि के मनदिर निर्माण भरहल छै। देश बिदेश मे रहबला सम्पुर्ण ग्राम बासी जे कोनो देश मे छि सब कोयस सहयोग कर के लेल अनुरोध करै छि। सहयोग कैनिहार सब कोय के चंदा दाता मे मंदिर मे नाम लिखल जाइत। बिदेश मे कतै रहा बला प्रबासी अपना ईच्छा अनुसार सहयोग कसकै छि।साउदि मे दिपेन्द्र प्रसाद यादव मोबाइल 0598995130 कतार मे मनिष राय । जय मिथिला।।

सतोषर समाज कल्याण दोहा कतार सम्पुर्ण ग्राम बसि मे हार्दिक अपिल  करहल छि। कि सतोषर धाम मे रहल shree ram janki high school के प्राङ्गण मे सरस्वती जि के मनदिर निर्माण भरहल छै।  देश बिदेश  मे रहबला सम्पुर्ण ग्राम बासी जे कोनो देश मे छि  सब कोयस  सहयोग कर के लेल  अनुरोध करै छि।  सहयोग […]

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आज विवाह पञ्चमी, जनकपुरमा रामजानकी विवाह महोत्सव  जनकपुर, पुस १ । ऐतिहासिक रामजानकी विवाह महोत्सव आज जनकपुरधाममा हर्षोल्लासका साथ मनाईंदैछ । प्रत्येक वर्ष मंसिर शुक्ल पञ्चमीका दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम र आदर्श नारी सीताबीच त्रेता युगमा भएको विवाहको स्मरणमा विवाह पञ्चमी महोत्सव मनाउने गरिन्छ । सात दिने विवाह पञ्चमी महोत्सवको आज छैठौं दिन जनकपुरको जानकी मन्दिरमा वैदिक परम्परा अनुसार राम र सीताबीच विवाह हुनेछ । दिउँसो जनकपुरको जानकी मन्दिरबाट निस्केको सीताको डोली र राम मन्दिरबाट निस्केको रामको डोली रंगभूमि मैदानमा पुगी सीता स्वयम्वर कार्यक्रम आयोजना गरिने छ । महोत्सवमा भारतको अयोध्यासहित विभिन्न स्थानबाट हजारौंको संख्यामा जन्ती आएका छन् । पवित्र सरोवर गंगासागर, धनुषसागरसहितका जलासयमा स्नान गरी राम मन्दिर र जानकी मन्दिरमा पूजापाठ गर्न श्रद्धालु भक्तजनको विहानैदेखि भीड लागेको छ । स्थानीय संघ संस्थाले हजारौं श्रद्धालुलाई निःशुल्क रुपमा आवास र भोजन उपलब्ध गराएका छन् । विवाह सकिएपछि भोलि जानकी मन्दिरका महन्थ रामतपेश्वर दास बैष्णवले भारतको अयोध्याबाट आएका जन्तीलाई लत्ता कपडा, प्रसाद दिई विदाई गर्नेछन् ।

आज विवाह पञ्चमी, जनकपुरमा रामजानकी विवाह महोत्सव जनकपुर, पुस १ । ऐतिहासिक रामजानकी विवाह महोत्सव आज जनकपुरधाममा हर्षोल्लासका साथ मनाईंदैछ । प्रत्येक वर्ष मंसिर शुक्ल पञ्चमीका दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम र आदर्श नारी सीताबीच त्रेता युगमा भएको विवाहको स्मरणमा विवाह पञ्चमी महोत्सव मनाउने गरिन्छ । सात दिने विवाह पञ्चमी महोत्सवको आज छैठौं दिन जनकपुरको जानकी मन्दिरमा वैदिक परम्परा अनुसार राम र सीताबीच विवाह हुनेछ । दिउँसो जनकपुरको जानकी मन्दिरबाट निस्केको सीताको डोली र राम मन्दिरबाट निस्केको रामको डोली रंगभूमि मैदानमा पुगी सीता स्वयम्वर कार्यक्रम आयोजना गरिने छ । महोत्सवमा भारतको अयोध्यासहित विभिन्न स्थानबाट हजारौंको संख्यामा जन्ती आएका छन् । पवित्र सरोवर गंगासागर, धनुषसागरसहितका जलासयमा स्नान गरी राम मन्दिर र जानकी मन्दिरमा पूजापाठ गर्न श्रद्धालु भक्तजनको विहानैदेखि भीड लागेको छ । स्थानीय संघ संस्थाले हजारौं श्रद्धालुलाई निःशुल्क रुपमा आवास र भोजन उपलब्ध गराएका छन् । विवाह सकिएपछि भोलि जानकी मन्दिरका महन्थ रामतपेश्वर दास बैष्णवले भारतको अयोध्याबाट आएका जन्तीलाई लत्ता कपडा, प्रसाद दिई विदाई गर्नेछन् ।

मिथिलाक ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी जनकपुर मे नगर दर्शन सँ शुभारम्भ भेल विवाह पञ्चमी महोत्सव अन्तर्गत सोम दिन श्रीराम मन्दिरक प्राङ्गण मे विशेष धुमधाम सँग तिलकोत्सव समारोह होयत   समारोह मे कनियाँ पक्षक भूमिका जानकी मन्दिर करैत आयल अछि त वर पक्षक नेतृत्व राम मन्दिर करैत आबि रहल अछि। तिलकोत्सवक समारोहक सम्पुर्ण तयारी पूरा भऽ चुकल   शुक्र दिन नगरदर्शन लऽ कऽ शुरु भेल विवाहपञ्चमी अन्तर्गत शनि दिन फूलबारी लीला आ रवि दिन धनुष यज्ञ सम्पन्न भऽ चुकल अछि। मिथिला मे जाहि प्रकारें बेटीक विवाहदान होइत आबि रहल अछि वैह पारम्परिक ढंग एवं वैदिक विधान सँ सब वैवाहिक कार्य एहि महोत्सव मे आयोजित होयत से जानकी मन्दिरक छोटे महन्थ राम रौशन दास वैष्णव जानकारी देलाह। तहिना काल्हि (मंगल दिन ) मटकोर, बुध दिन स्वयंवर, विवाह आ बृहस्पति दिन रामकलेवा (बिदाई) संग महोत्सव समापन कैल  वैवाहिक कार्यक्रम मे देखवा लेल भारतक अयोध्या, मथुरा, लगायतक शहर सभ सँ बराती आबैत अछि। अहि बेर अयोध्या सँ करिब ३०० सय केर संख्या मे साधु-संत सभ बराती अयत  रामजानकी विवाहपञ्चमीक अवसर हुवयवला अपराधिक गतिविधि पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था कडा कैल गेल अछि। तहिना विवाहपञ्चमी अवधि भरि नगर परिक्रमा क्षेत्र भितर माँस, मदिराक बिक्री-वितरण ऊपर सशक्त रुप सँ निषेध लगायल गेल अछि।  एम्हर नेपालक नव संविधान मे अप्पन अधिकारक लेल आन्दोलनरत पक्षक द्वारा विवाहपञ्चमी लऽ कऽ बजार दुकान सभ खोलय देल गेल अछि।  जनकपुरक रंगभूमि मे आयोजना कैल स्वंयम्वर मे ३३ कोटि देवी-देवता सभक उपस्थिति रहैक से रामायण मे उल्लेखित अछि। ताहि प्रसंग केर प्रतीकात्मक प्रस्तुति देखौनाय विवाहपञ्चमीक विशेषता रहल अछि।  विवाहपञ्चमी महोत्सवक लेल जानकी मन्दिर आर विवाहमण्डप नवकनियाँ जकाँ सजायल-सिंगारल गेल अछि तऽ आधुनिक बिजुली बत्ती सभक झालैर आदि सँ सेहो भवनादिकेँ सजाओल गेल अछि।

मिथिलाक ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी जनकपुर मे नगर दर्शन सँ शुभारम्भ भेल विवाह पञ्चमी महोत्सव अन्तर्गत सोम दिन श्रीराम मन्दिरक प्राङ्गण मे विशेष धुमधाम सँग तिलकोत्सव समारोह होयत समारोह मे कनियाँ पक्षक भूमिका जानकी मन्दिर करैत आयल अछि त वर पक्षक नेतृत्व राम मन्दिर करैत आबि रहल अछि। तिलकोत्सवक समारोहक सम्पुर्ण तयारी पूरा भऽ चुकल शुक्र दिन नगरदर्शन लऽ कऽ शुरु भेल विवाहपञ्चमी अन्तर्गत शनि दिन फूलबारी लीला आ रवि दिन धनुष यज्ञ सम्पन्न भऽ चुकल अछि। मिथिला मे जाहि प्रकारें बेटीक विवाहदान होइत आबि रहल अछि वैह पारम्परिक ढंग एवं वैदिक विधान सँ सब वैवाहिक कार्य एहि महोत्सव मे आयोजित होयत से जानकी मन्दिरक छोटे महन्थ राम रौशन दास वैष्णव जानकारी देलाह। तहिना काल्हि (मंगल दिन ) मटकोर, बुध दिन स्वयंवर, विवाह आ बृहस्पति दिन रामकलेवा (बिदाई) संग महोत्सव समापन कैल वैवाहिक कार्यक्रम मे देखवा लेल भारतक अयोध्या, मथुरा, लगायतक शहर सभ सँ बराती आबैत अछि। अहि बेर अयोध्या सँ करिब ३०० सय केर संख्या मे साधु-संत सभ बराती अयत रामजानकी विवाहपञ्चमीक अवसर हुवयवला अपराधिक गतिविधि पर प्रशासन द्वारा सुरक्षा व्यवस्था कडा कैल गेल अछि। तहिना विवाहपञ्चमी अवधि भरि नगर परिक्रमा क्षेत्र भितर माँस, मदिराक बिक्री-वितरण ऊपर सशक्त रुप सँ निषेध लगायल गेल अछि। एम्हर नेपालक नव संविधान मे अप्पन अधिकारक लेल आन्दोलनरत पक्षक द्वारा विवाहपञ्चमी लऽ कऽ बजार दुकान सभ खोलय देल गेल अछि। जनकपुरक रंगभूमि मे आयोजना कैल स्वंयम्वर मे ३३ कोटि देवी-देवता सभक उपस्थिति रहैक से रामायण मे उल्लेखित अछि। ताहि प्रसंग केर प्रतीकात्मक प्रस्तुति देखौनाय विवाहपञ्चमीक विशेषता रहल अछि। विवाहपञ्चमी महोत्सवक लेल जानकी मन्दिर आर विवाहमण्डप नवकनियाँ जकाँ सजायल-सिंगारल गेल अछि तऽ आधुनिक बिजुली बत्ती सभक झालैर आदि सँ सेहो भवनादिकेँ सजाओल गेल अछि।

मिति२०७२ मंसिर २४ गते धनुषा जिल्ला कुसमाहा सतोषर धाम मे  तसकर सब के मोर्चा के नेता राजा राम कापर के अगुवाइ मे मोर्चा के कार्यकर्ता सब तसकर सब के अपन नियन्त्रण मे लक ३०० लिटर डिजल  ५० लिटर पेट्रोल  नष्ट कैल गेल छै । समाचार दाता-bharoshi ray

मिति२०७२ मंसिर २४ गते धनुषा जिल्ला कुसमाहा सतोषर धाम मे तसकर सब के मोर्चा के नेता राजा राम कापर के अगुवाइ मे मोर्चा के कार्यकर्ता सब तसकर सब के अपन नियन्त्रण मे लक ३०० लिटर डिजल ५० लिटर पेट्रोल नष्ट कैल गेल छै । समाचार दाता-bharoshi ray

काठमाडाैं, मंसिर ७ । हस्तलिखित पासपोर्ट आज सोमबारदेखि विश्वभर चल्ने भएको छ । आइकाओको बाध्यकारी नियमअनुसार अनुसार अब विश्वभर नै बारकोड नभएको अर्थात हातले नलेखेको पासपोर्ट उपयोगमा ल्याउन पाइदैन । सरकारले सोमबारदेखि नै पासपोर्टमा प्रत्यक्षदर्ता प्रणाली लागू गर्ने भएको छ । ६ महिनाअघि देखि नै कतिपय मुलुकलले हस्तलिखित पासपोर्टमा भिसा नदिइ एमआरपी माग गर्दै आएका छन् । अाजकाे  कान्तिपुर दैनिकमा खबर रहेकाे छ ।

काठमाडाैं, मंसिर ७ । हस्तलिखित पासपोर्ट आज सोमबारदेखि विश्वभर चल्ने भएको छ । आइकाओको बाध्यकारी नियमअनुसार अनुसार अब विश्वभर नै बारकोड नभएको अर्थात हातले नलेखेको पासपोर्ट उपयोगमा ल्याउन पाइदैन । सरकारले सोमबारदेखि नै पासपोर्टमा प्रत्यक्षदर्ता प्रणाली लागू गर्ने भएको छ । ६ महिनाअघि देखि नै कतिपय मुलुकलले हस्तलिखित पासपोर्टमा भिसा नदिइ एमआरपी माग गर्दै आएका छन् । अाजकाे कान्तिपुर दैनिकमा खबर रहेकाे छ ।

जनकपुर उप महानगर पालिका वडा 4 मा बम बिस्फोट  सिरहा जिल्ला गौरी पुर घर भई जनक मा हाल डेरा गरी बस्ने श्रावण यादब सिकिस्त । अंचल अस्पताल मा इलाज़ हुँदै । बिस्तृत बिबरन आउन बाँकी । प्रहरी अनुसन्धान मा ब्यस्त । तस्विर सौजनय =घनश्याम मिश्र जनकपुर

जनकपुर उप महानगर पालिका वडा 4 मा बम बिस्फोट सिरहा जिल्ला गौरी पुर घर भई जनक मा हाल डेरा गरी बस्ने श्रावण यादब सिकिस्त । अंचल अस्पताल मा इलाज़ हुँदै । बिस्तृत बिबरन आउन बाँकी । प्रहरी अनुसन्धान मा ब्यस्त । तस्विर सौजनय =घनश्याम मिश्र जनकपुर

जनकपुर उप महानगर पालिका वडा 4 मा बम बिस्फोट  सिरहा जिल्ला गौरी पुर घर भई जनक मा हाल डेरा गरी बस्ने श्रावण यादब सिकिस्त । अंचल अस्पताल मा इलाज़ हुँदै । बिस्तृत बिबरन आउन बाँकी । प्रहरी अनुसन्धान मा ब्यस्त । तस्विर सौजनय =घनश्याम मिश्र जनकपुर

जनकपुर उप महानगर पालिका वडा 4 मा बम बिस्फोट सिरहा जिल्ला गौरी पुर घर भई जनक मा हाल डेरा गरी बस्ने श्रावण यादब सिकिस्त । अंचल अस्पताल मा इलाज़ हुँदै । बिस्तृत बिबरन आउन बाँकी । प्रहरी अनुसन्धान मा ब्यस्त । तस्विर सौजनय =घनश्याम मिश्र जनकपुर

मंसिर ५, २०७२- सत्तारुढ दल र प्रमुख प्रतिपक्षी दल तराई मधेसमा देखिएको समस्या समाधान गर्न सहमत भएका छन् । सिंहदरबारमा आज भएको द्विपक्षीय छलफलमा तराई मधेसमा आन्दोलनरत मधेसी मोर्चासँग सकारात्मक र परिणाममुखी वार्ता गर्नुपर्ने र मुलुकले भोग्नु परेको समस्यालाई समाधान गर्न ती दल एकमत भएका हुन् । नेपाली कांग्रेसले आयोजना गरेको छलफलमा वार्तालाई परिणाममुखी बनाउने र व्यवस्थापिका–संसद्मा दर्ता भएको ‘संविधान संशोधन विधेयक’ र ‘पुनःनिर्माण प्राधिकरण गठनसम्बन्धी विधेयक’लाई तत्काल पारित गरेर जाने विषयमा समेत कुराकानी भएको थियो । सबै पक्षले पार्टीभित्र एकसरो छलफल गरेर तराई मधेसको समस्यालाई सार्थक निष्कर्षमा पुर्याउनुपर्ने र समस्या लामो समय राख्न नहुनेमा मतैक्य भएको बैठकपछि नेताहरुले प्रतिक्रिया दिएका छन् । बैठकपछि सञ्चारकर्मीसँग कुरा गर्दै एकीकृत नेकपा(माओवादी)का अध्यक्ष पुष्पकमल दाहालले तराई मधेसको आन्दोलन, नेपाल–भारत सीमामा भइरहेको नाकाबन्दी र आपूर्ति व्यवस्थापनमा भएको समस्याको बारेमा आजको बैठक केन्द्रित रहेको प्रतिक्रिया दिए । मूल समस्यालाई समाधान गर्न सरकारमा रहेका दल र प्रमुख प्रतिपक्षी दलबीच साझा धारणा बनाउन सौर्हाद्रपूर्ण वातावरणमा छलफल भएको र प्रमुख दलहरुबीच पनि समान धारणा हुनुपर्छ भन्नेमा बैठकमा महत्वपूर्ण छलफल भएको उनले बताए । अध्यक्ष दाहालले भने, ‘तराई–मधेसको आन्दोलन र नाकाबन्दीबाट सिर्जिएको अवस्था बारे साझा धारणा बनाउन आवश्यक छ भन्ने विषयमा कुरा अगाडि बढेको छ । आ–आफ्नो पार्टीमा छलफल गरेर अगाडि बढ्ने र छिट्टै अर्को बैठक बस्ने सहमति भएको छ । सबै पक्षमा समस्याको निरुपण गर्नुपर्नेमा मतैक्य देखिएको छ ।’ अत्यावश्यकीय सामग्रीको आयातमा कुनै अवरोध नगर्ने भन्ने मोर्चाको निर्णय आएपनि औषधि, इन्धन आपूर्तिमा अवरोध भइरहेकाप्रति आन्दोलनरत पक्ष गम्भीर रहेको आफूले पाएको बताउँदै अध्यक्ष दाहालले ट्रक, एम्बुलेन्समाथि भएको प्रहारसमेत अमानवीय भएको स्पष्ट पारे । उनले भने, ‘सकेसम्म यो समस्यालाई छिटो टुङ्ग्याउने पक्षमा हामी छौँ । प्रमुख तीन दल समस्या समाधानमा प्रतिबद्ध भएर लाग्ने सहमति भएको छ ।’ कांग्रेस प्रवक्ता दीलेन्द्रप्रसाद बडूले हामीले बोलाएको बैठकमा प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली सहभागी हुने बताइएपनि उहाँ सहभागी नहुनु भएको भन्दै मधेसी मोर्चासँगको वार्तालाई सकारात्मक बनाउन ठोस धारणा तयार गर्न दुवै पक्ष सहमत भएको बताए । मुलुकलाई परेको समस्या समाधान गर्न आपसी परामर्शलाई तीव्र पार्ने र चाँडोभन्दा चाँडो सहमति खोज्न प्रतिबद्ध भएको उल्लेख गर्दै प्रवक्ता बडूले सदनमा दर्ता भएको संविधान संशोधन विधेयक र पुनःनिर्माण प्राधिकरण विधेयक तत्काल पारित गर्न आग्रह गरेको स्पष्ट पारे । राष्ट्र बैंकमा आन्दोलन किन? कांग्रेस बैठकमा कांग्रेसले पुनःनिर्माण प्राधिकरणको प्रमुख कार्यकारी अधिकृत आफ्नो नेतृत्वको सरकारले नियुक्त गरेको व्यक्ति नै हुनुपर्ने जिकिर गरेको थियो । कांग्रेस नेतृत्वको सरकारले प्रा डा गोविन्दराज पोखरेललाई प्राधिकरणको प्रमुख कार्यकारी अधिकृतमा नियुक्त गरेको थियो । यस्तै नेपाल राष्ट्र बैंकमा भइरहेको आन्दोलनले समग्र आर्थिक अवस्थामा समेत प्रतिकूल प्रभाव पारेको भन्दै कांग्रेसले बैठकमा नेकपा(एमाले) सम्बद्ध कर्मचारीबाट भइरहेको धर्ना र घेराबन्दी किन भइरहेको छ भन्ने प्रश्न गरेको थियो । मधेसी जनअधिकार फोरम नेपाल(लोकतान्त्रिक)का अध्यक्ष विजयकुमार गच्छदारले मुलुकले भोग्नुपरेको समस्याको समाधान कसरी गर्ने भन्ने विषयमा छलफल भएको बताए । ‘बन्द हड्ताल, आन्दोलनले असहज परिस्थिति छ । सो समस्याको समाधानका विषयमा छलफल भयो । यो सत्तापक्षको मात्र समस्या होइन, सबै दल, राष्ट्रको समस्या हो, त्यसलाई समाधान गर्न तीन ठूला पार्टीले समान धारणा बनाउनुपर्यो । अनि मात्र समस्याको समाधान हुन्छ भन्नेमा हामीले जोड दियौँ’ अध्यक्ष गच्छदारले भने । बैठकमा सत्तारुढ र प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेसका शीर्ष नेताहरुको सहभागिता थियो । हाम्रो समाज वाट…….

मंसिर ५, २०७२- सत्तारुढ दल र प्रमुख प्रतिपक्षी दल तराई मधेसमा देखिएको समस्या समाधान गर्न सहमत भएका छन् । सिंहदरबारमा आज भएको द्विपक्षीय छलफलमा तराई मधेसमा आन्दोलनरत मधेसी मोर्चासँग सकारात्मक र परिणाममुखी वार्ता गर्नुपर्ने र मुलुकले भोग्नु परेको समस्यालाई समाधान गर्न ती दल एकमत भएका हुन् । नेपाली कांग्रेसले आयोजना गरेको छलफलमा वार्तालाई परिणाममुखी बनाउने र व्यवस्थापिका–संसद्मा दर्ता भएको ‘संविधान संशोधन विधेयक’ र ‘पुनःनिर्माण प्राधिकरण गठनसम्बन्धी विधेयक’लाई तत्काल पारित गरेर जाने विषयमा समेत कुराकानी भएको थियो । सबै पक्षले पार्टीभित्र एकसरो छलफल गरेर तराई मधेसको समस्यालाई सार्थक निष्कर्षमा पुर्याउनुपर्ने र समस्या लामो समय राख्न नहुनेमा मतैक्य भएको बैठकपछि नेताहरुले प्रतिक्रिया दिएका छन् । बैठकपछि सञ्चारकर्मीसँग कुरा गर्दै एकीकृत नेकपा(माओवादी)का अध्यक्ष पुष्पकमल दाहालले तराई मधेसको आन्दोलन, नेपाल–भारत सीमामा भइरहेको नाकाबन्दी र आपूर्ति व्यवस्थापनमा भएको समस्याको बारेमा आजको बैठक केन्द्रित रहेको प्रतिक्रिया दिए । मूल समस्यालाई समाधान गर्न सरकारमा रहेका दल र प्रमुख प्रतिपक्षी दलबीच साझा धारणा बनाउन सौर्हाद्रपूर्ण वातावरणमा छलफल भएको र प्रमुख दलहरुबीच पनि समान धारणा हुनुपर्छ भन्नेमा बैठकमा महत्वपूर्ण छलफल भएको उनले बताए । अध्यक्ष दाहालले भने, ‘तराई–मधेसको आन्दोलन र नाकाबन्दीबाट सिर्जिएको अवस्था बारे साझा धारणा बनाउन आवश्यक छ भन्ने विषयमा कुरा अगाडि बढेको छ । आ–आफ्नो पार्टीमा छलफल गरेर अगाडि बढ्ने र छिट्टै अर्को बैठक बस्ने सहमति भएको छ । सबै पक्षमा समस्याको निरुपण गर्नुपर्नेमा मतैक्य देखिएको छ ।’ अत्यावश्यकीय सामग्रीको आयातमा कुनै अवरोध नगर्ने भन्ने मोर्चाको निर्णय आएपनि औषधि, इन्धन आपूर्तिमा अवरोध भइरहेकाप्रति आन्दोलनरत पक्ष गम्भीर रहेको आफूले पाएको बताउँदै अध्यक्ष दाहालले ट्रक, एम्बुलेन्समाथि भएको प्रहारसमेत अमानवीय भएको स्पष्ट पारे । उनले भने, ‘सकेसम्म यो समस्यालाई छिटो टुङ्ग्याउने पक्षमा हामी छौँ । प्रमुख तीन दल समस्या समाधानमा प्रतिबद्ध भएर लाग्ने सहमति भएको छ ।’ कांग्रेस प्रवक्ता दीलेन्द्रप्रसाद बडूले हामीले बोलाएको बैठकमा प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली सहभागी हुने बताइएपनि उहाँ सहभागी नहुनु भएको भन्दै मधेसी मोर्चासँगको वार्तालाई सकारात्मक बनाउन ठोस धारणा तयार गर्न दुवै पक्ष सहमत भएको बताए । मुलुकलाई परेको समस्या समाधान गर्न आपसी परामर्शलाई तीव्र पार्ने र चाँडोभन्दा चाँडो सहमति खोज्न प्रतिबद्ध भएको उल्लेख गर्दै प्रवक्ता बडूले सदनमा दर्ता भएको संविधान संशोधन विधेयक र पुनःनिर्माण प्राधिकरण विधेयक तत्काल पारित गर्न आग्रह गरेको स्पष्ट पारे । राष्ट्र बैंकमा आन्दोलन किन? कांग्रेस बैठकमा कांग्रेसले पुनःनिर्माण प्राधिकरणको प्रमुख कार्यकारी अधिकृत आफ्नो नेतृत्वको सरकारले नियुक्त गरेको व्यक्ति नै हुनुपर्ने जिकिर गरेको थियो । कांग्रेस नेतृत्वको सरकारले प्रा डा गोविन्दराज पोखरेललाई प्राधिकरणको प्रमुख कार्यकारी अधिकृतमा नियुक्त गरेको थियो । यस्तै नेपाल राष्ट्र बैंकमा भइरहेको आन्दोलनले समग्र आर्थिक अवस्थामा समेत प्रतिकूल प्रभाव पारेको भन्दै कांग्रेसले बैठकमा नेकपा(एमाले) सम्बद्ध कर्मचारीबाट भइरहेको धर्ना र घेराबन्दी किन भइरहेको छ भन्ने प्रश्न गरेको थियो । मधेसी जनअधिकार फोरम नेपाल(लोकतान्त्रिक)का अध्यक्ष विजयकुमार गच्छदारले मुलुकले भोग्नुपरेको समस्याको समाधान कसरी गर्ने भन्ने विषयमा छलफल भएको बताए । ‘बन्द हड्ताल, आन्दोलनले असहज परिस्थिति छ । सो समस्याको समाधानका विषयमा छलफल भयो । यो सत्तापक्षको मात्र समस्या होइन, सबै दल, राष्ट्रको समस्या हो, त्यसलाई समाधान गर्न तीन ठूला पार्टीले समान धारणा बनाउनुपर्यो । अनि मात्र समस्याको समाधान हुन्छ भन्नेमा हामीले जोड दियौँ’ अध्यक्ष गच्छदारले भने । बैठकमा सत्तारुढ र प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेपाली कांग्रेसका शीर्ष नेताहरुको सहभागिता थियो । हाम्रो समाज वाट…….

आइ के बजार के कुछ झलक येहन छल :oops::oops: यी बजार गा बि स खरिहानी वडा नमबर ८ , पूरबारी कता के हबे । यी जगह के नाम येछ श्री हनुमान चोक अमरखाना जैठाम कुछ दिन पहले ॐ मा लक्ष्मी जी के मेला लागल छल ! ये बजारमे ५०० से जादा आदमिसबके भिर छल और बेपारी सब बहुत खुसि के साथ् आपन आपन समान बेच के गर सबेरे गेल । यी बजार हप्ता मे २ दिन लगैया । एकदिन सुकर के त दोसर दिन सोम के । जैठाम गेरुवाही , मिसरपट्टि , खरिहानी , सोनागमा और साथामे बाट मे आइल गेल यात्रु सबके भिर सहो लागल छल । पैकार और गराहक सब से कुछ सबाल पुछालक । कि ये बजार केहन लागल आहासबके ? बजारमे अाइल यात्रु सब कहलक कि हमसबके बहुत निक लागल और बहुत खुसि छि जेना कि हम सब अपना घरेमे समान सब खरिद बिक्री करैछी ! यी बजार के निगरानी और सरसफाई सब सम्पूर्ण गाम बासि और अनुमान कलब के निगरानी मे लाग रहल हबे ।

आइ के बजार के कुछ झलक येहन छल :oops::oops: यी बजार गा बि स खरिहानी वडा नमबर ८ , पूरबारी कता के हबे । यी जगह के नाम येछ श्री हनुमान चोक अमरखाना जैठाम कुछ दिन पहले ॐ मा लक्ष्मी जी के मेला लागल छल ! ये बजारमे ५०० से जादा आदमिसबके भिर छल और बेपारी सब बहुत खुसि के साथ् आपन आपन समान बेच के गर सबेरे गेल । यी बजार हप्ता मे २ दिन लगैया । एकदिन सुकर के त दोसर दिन सोम के । जैठाम गेरुवाही , मिसरपट्टि , खरिहानी , सोनागमा और साथामे बाट मे आइल गेल यात्रु सबके भिर सहो लागल छल । पैकार और गराहक सब से कुछ सबाल पुछालक । कि ये बजार केहन लागल आहासबके ? बजारमे अाइल यात्रु सब कहलक कि हमसबके बहुत निक लागल और बहुत खुसि छि जेना कि हम सब अपना घरेमे समान सब खरिद बिक्री करैछी ! यी बजार के निगरानी और सरसफाई सब सम्पूर्ण गाम बासि और अनुमान कलब के निगरानी मे लाग रहल हबे ।

अप्पन मिथिलाञ्चलक मैथिली कलम सँ प्रस्तुत अछि सामा चकेवा के शुभकामना संग ई #मैथिली_रचना   भरि साल ओ रहली सासुर नैहर आब बजाबू  एलै देखियौ खरनाके दिन सामा चलू बनाबू  छोटकी बहिनो हंस बनाबू जेठकी दिदी चकेबा हम बनाबी ढोलकियासब भौजी बनबू चुगला  एलै केहन सोहाबन रतिया  चकमक करै चंगेरा  ताँहिपर चारुदिस पसरल सामा दाइके डेरा   गैयौ सबकिओ गीत गोसाओन करियौ श्री गणेश भैया जिता’ सालो-साल करथिन् कृपा महेश   समा-चकेबा खेलू बहिना नीक गीतसब गाबू भैया घर हो अनधन सोना चुगलाके मुंह झरकाबू  © बिन्देश्वेर ठाकुर  #अपन_मिथिला #सामा_चकेवा

अप्पन मिथिलाञ्चलक मैथिली कलम सँ प्रस्तुत अछि सामा चकेवा के शुभकामना संग ई #मैथिली_रचना भरि साल ओ रहली सासुर नैहर आब बजाबू एलै देखियौ खरनाके दिन सामा चलू बनाबू छोटकी बहिनो हंस बनाबू जेठकी दिदी चकेबा हम बनाबी ढोलकियासब भौजी बनबू चुगला एलै केहन सोहाबन रतिया चकमक करै चंगेरा ताँहिपर चारुदिस पसरल सामा दाइके डेरा गैयौ सबकिओ गीत गोसाओन करियौ श्री गणेश भैया जिता’ सालो-साल करथिन् कृपा महेश समा-चकेबा खेलू बहिना नीक गीतसब गाबू भैया घर हो अनधन सोना चुगलाके मुंह झरकाबू © बिन्देश्वेर ठाकुर #अपन_मिथिला #सामा_चकेवा

अप्पन मिथिलाञ्चलक मैथिली कलम सँ प्रस्तुत अछि सामा चकेवा के शुभकामना संग ई #मैथिली_रचना   भरि साल ओ रहली सासुर नैहर आब बजाबू  एलै देखियौ खरनाके दिन सामा चलू बनाबू  छोटकी बहिनो हंस बनाबू जेठकी दिदी चकेबा हम बनाबी ढोलकियासब भौजी बनबू चुगला  एलै केहन सोहाबन रतिया  चकमक करै चंगेरा  ताँहिपर चारुदिस पसरल सामा दाइके डेरा   गैयौ सबकिओ गीत गोसाओन करियौ श्री गणेश भैया जिता’ सालो-साल करथिन् कृपा महेश   समा-चकेबा खेलू बहिना नीक गीतसब गाबू भैया घर हो अनधन सोना चुगलाके मुंह झरकाबू  © बिन्देश्वेर ठाकुर  #अपन_मिथिला #सामा_चकेवा

अप्पन मिथिलाञ्चलक मैथिली कलम सँ प्रस्तुत अछि सामा चकेवा के शुभकामना संग ई #मैथिली_रचना भरि साल ओ रहली सासुर नैहर आब बजाबू एलै देखियौ खरनाके दिन सामा चलू बनाबू छोटकी बहिनो हंस बनाबू जेठकी दिदी चकेबा हम बनाबी ढोलकियासब भौजी बनबू चुगला एलै केहन सोहाबन रतिया चकमक करै चंगेरा ताँहिपर चारुदिस पसरल सामा दाइके डेरा गैयौ सबकिओ गीत गोसाओन करियौ श्री गणेश भैया जिता’ सालो-साल करथिन् कृपा महेश समा-चकेबा खेलू बहिना नीक गीतसब गाबू भैया घर हो अनधन सोना चुगलाके मुंह झरकाबू © बिन्देश्वेर ठाकुर #अपन_मिथिला #सामा_चकेवा

राजविराज ४ मंसिर । मधेशका जिल्लाहरुमा पनि एमाओवादी परित्याग गरी नयाँ शक्ति निर्माण कार्यको थालनी भइसकेको छ । राजविराजमा आयोजित एक कार्यक्रमका बीच एक सय पचास जनाले एकिकृत नेकपा माओवादी परित्यागको घोषणा गर्दै समिति गठन गरेको छ । अरुण कुमार साह ‘अनिल’को अध्यक्षता एवम् वरिष्ठ नेता रामचन्द्र झाको प्रमुख आतिथ्य तथा नेताहरु महेन्द्र पासवान, रामकुमार शर्मा र रामरिझन यादवको विशेष उपस्थितिमा पार्टी परित्याग गर्दै ७५ सदस्यीय समिति समेत गठन गरेको छ । नयाँ शक्ति निर्माण अभियान अन्तर्गत उक्त समिति गठन गरिएको जनाइएको छ । संगठन परित्याग गर्नेहरुमा अरुण कुमार साह, ‘अनिल’, छेदी साफी, प्रेमनारायण यादव, चन्द्रदेव मण्डल, जयप्रकाश राउत, देवलाल माली, लक्ष्मी चौधरी, दिपनारायण साह, रामप्रसाद मण्डल, सिंहेश्वर साह, तेजनारायण यादव, मखन साह, रामअवतार यादव, राजु जयशवाल रहेका छन् । यसैगरी भुवनेश्वर पासवान, रामचन्द्र यादव, सूर्यनारायण मण्डल, राजलाल राम, प्रकाश गुप्ता, उज्जवल बिक, कमला गौतम साह, हिरु चौधरी, शम्भु चौधरी, शितल यादव, रामनारायण यादव, रामकृष्ण पासवान, जितेन्द्र यादव, सोभित साह, कपलेश्वर ठाकुरलगायतका रहेका छन् । नवगठित उक्त समितिले मधेशमा जारी आन्दोलनप्रति ऐक्यवद्धता जनाउँदै आन्दोलनमा समर्थन र सक्रिय सहभागिता जनाउने निर्णय समेत गरेको छ । -न्यूजटुडे  हाम्रो समाज वाट…….

राजविराज ४ मंसिर । मधेशका जिल्लाहरुमा पनि एमाओवादी परित्याग गरी नयाँ शक्ति निर्माण कार्यको थालनी भइसकेको छ । राजविराजमा आयोजित एक कार्यक्रमका बीच एक सय पचास जनाले एकिकृत नेकपा माओवादी परित्यागको घोषणा गर्दै समिति गठन गरेको छ । अरुण कुमार साह ‘अनिल’को अध्यक्षता एवम् वरिष्ठ नेता रामचन्द्र झाको प्रमुख आतिथ्य तथा नेताहरु महेन्द्र पासवान, रामकुमार शर्मा र रामरिझन यादवको विशेष उपस्थितिमा पार्टी परित्याग गर्दै ७५ सदस्यीय समिति समेत गठन गरेको छ । नयाँ शक्ति निर्माण अभियान अन्तर्गत उक्त समिति गठन गरिएको जनाइएको छ । संगठन परित्याग गर्नेहरुमा अरुण कुमार साह, ‘अनिल’, छेदी साफी, प्रेमनारायण यादव, चन्द्रदेव मण्डल, जयप्रकाश राउत, देवलाल माली, लक्ष्मी चौधरी, दिपनारायण साह, रामप्रसाद मण्डल, सिंहेश्वर साह, तेजनारायण यादव, मखन साह, रामअवतार यादव, राजु जयशवाल रहेका छन् । यसैगरी भुवनेश्वर पासवान, रामचन्द्र यादव, सूर्यनारायण मण्डल, राजलाल राम, प्रकाश गुप्ता, उज्जवल बिक, कमला गौतम साह, हिरु चौधरी, शम्भु चौधरी, शितल यादव, रामनारायण यादव, रामकृष्ण पासवान, जितेन्द्र यादव, सोभित साह, कपलेश्वर ठाकुरलगायतका रहेका छन् । नवगठित उक्त समितिले मधेशमा जारी आन्दोलनप्रति ऐक्यवद्धता जनाउँदै आन्दोलनमा समर्थन र सक्रिय सहभागिता जनाउने निर्णय समेत गरेको छ । -न्यूजटुडे हाम्रो समाज वाट…….

छठको पर्वको तेश्रो दिन आज, ३६ घण्टा लामो व्रत शुरु  जनकपुर । लोकआस्थाको महापर्व छठको आज तेश्रो तथा मुख्य दिन व्रतालुहरु भक्तिभावका साथ साझ अस्ताउदो सूर्यलाई अर्घ दिने तयारी गर्दैछन् । छठ मिथिला तथा तराईवासीहरुको सबैभन्दा ठूलो र पवित्र पर्व हो ।  परिवारका सम्पूर्ण सदस्यहरुको सहभागीता रहने यस पर्वमा हरेक सदस्यले शुद्धता तथा पवित्रता प्रति विशेष ध्यान दिने गर्छन् । निकै कडा नियमका साथ पूजाको तयारी गरिने यस चाडमा चोखो तथा शुद्धताको निकै ध्यान दिने गरिन्छ ।  छठ पूजाको लागी जिल्लाभरीका अधिकांश नदी तथा पोखरी लगायतका जलाशयहरुको किनारलाई सफा सुग्घर पारी सिँगारिएको छ ।  झिलीमिली बत्तिले दुलही झै सजाइएका छठ घाटहरु यतिखेर व्रतालु तथा दर्शनार्थीहरुको लागि तयार छन् । यीनै छठ घाटहरुमा आज व्रतालुहरुले अस्ताउँदो सूर्यलाई पहिलो अर्घ दिनेछन् ।  संसारलाई जीवन दिने भगवान भाष्कर (सूर्यदेव)लाई विधिपूर्वक यस पर्वमा पूजा गर्ने गरिन्छ । चार दिनसम्म मनाइने यो पर्वको आज तेश्रो दिन सूर्य भक्तिमा लीन भएर पूजाआजा गर्दै साँझ अस्ताउँदो सूर्यलाई पहिलो अर्घ दिइने छ भने भोलि बिहान उदयमान सूर्यलाई दोश्रो अर्घ दिएपछि विधिपूर्वक यो पर्व सकिनेछ ।  ३६ घण्टा लामो निर्जल व्रत शुरु  सोमबार बेलुका माटोको चुल्होमा पकाएर तयार पारिएको खिर, रोटी, केरा तथा नुन बिनाको प्रसाद खाएका व्रतालुहरुको ३६ घण्टा लामो निर्जल र निराहार व्रत शुरु भइसकेको छ । हिजो बेलुका पूजा पश्चात खाएको प्रसादको भरमा रहेर व्रत बसेका व्रतालुहरुले अब भोलि बिहान सूर्यलाई अर्घ दिएपछि मात्र अन्न र जल ग्रहण गर्नेछन् ।  लगातार ३६ घण्टासम्म निर्जल र निराहार भएर गरिने यो व्रत तराईवासीले निकै आश्था र श्रद्धा पूर्वक मनाउने गर्छन् । नदी, पोखरी तथा जलाशयको किनारमा पूजा गर्दै बुधबार बिहान उदाउँदो सूर्यलाई अर्घ दिएर घर फर्केपछि मात्र व्रत समाप्त हुनेछ ।  तराईमा सबैभन्दा बढी श्रद्धा भक्तिका साथ मनाइने भएकाले यो पर्वलाई महापर्व पनि भनिन्छ । छठ व्रत गर्दा शरीरका रोगहरु नाश हुनुका साथै सन्तान प्राप्ती हुने र परीवारमा सुख शान्ति छाउने विश्वास छ ।  रौतहट जिल्लाको सदरमुकाम गौर लगायत गंगापिप्रा, शिवनगर, गरुडा, कटहरीया तथा चन्द्रनिगाहपुरका लाखौं व्रतालुहरुले भक्तिभावका साथ आज अस्ताउदो सूर्यलाई अर्घ दिनेछन् ।  धार्मिक मान्यता  चार दिनसम्म चल्ने छठ पर्वको कार्तिक शुक्ल चतुर्थीबाट शुरु भई कार्तिक शुक्ल सप्तमीमा सम्पन्न हुने गर्दछ ।  त्रेतायुगमा भगवान रामले लंका विजय गरे पछि रामराज्य स्थापनाको दिन कात्तिक शुक्ल षष्ठीका दिन भगवान राम र देवी सीताले व्रत बसेर सूर्य देवको पूजा गरेको र भोलिपल्ट सप्तमीका दिन पुनः बिहान उदाउँदै गरेको सूर्यलाई पूजा गरेर आशीर्वाद लिएकाले सोही दिनमा छठ पूजा गर्ने चलन चलेको पौराणिक मान्यता रहेको छ ।  छठ व्रतको बारेमा विष्णु पुराण, भागवत पुराण, ब्राहृाावैवर्त पुराण, देवी पुराण आदि प्राचिन धर्म ग्रन्थहरुमा समेत उल्लेख गरिएको छ ।

छठको पर्वको तेश्रो दिन आज, ३६ घण्टा लामो व्रत शुरु जनकपुर । लोकआस्थाको महापर्व छठको आज तेश्रो तथा मुख्य दिन व्रतालुहरु भक्तिभावका साथ साझ अस्ताउदो सूर्यलाई अर्घ दिने तयारी गर्दैछन् । छठ मिथिला तथा तराईवासीहरुको सबैभन्दा ठूलो र पवित्र पर्व हो । परिवारका सम्पूर्ण सदस्यहरुको सहभागीता रहने यस पर्वमा हरेक सदस्यले शुद्धता तथा पवित्रता प्रति विशेष ध्यान दिने गर्छन् । निकै कडा नियमका साथ पूजाको तयारी गरिने यस चाडमा चोखो तथा शुद्धताको निकै ध्यान दिने गरिन्छ । छठ पूजाको लागी जिल्लाभरीका अधिकांश नदी तथा पोखरी लगायतका जलाशयहरुको किनारलाई सफा सुग्घर पारी सिँगारिएको छ । झिलीमिली बत्तिले दुलही झै सजाइएका छठ घाटहरु यतिखेर व्रतालु तथा दर्शनार्थीहरुको लागि तयार छन् । यीनै छठ घाटहरुमा आज व्रतालुहरुले अस्ताउँदो सूर्यलाई पहिलो अर्घ दिनेछन् । संसारलाई जीवन दिने भगवान भाष्कर (सूर्यदेव)लाई विधिपूर्वक यस पर्वमा पूजा गर्ने गरिन्छ । चार दिनसम्म मनाइने यो पर्वको आज तेश्रो दिन सूर्य भक्तिमा लीन भएर पूजाआजा गर्दै साँझ अस्ताउँदो सूर्यलाई पहिलो अर्घ दिइने छ भने भोलि बिहान उदयमान सूर्यलाई दोश्रो अर्घ दिएपछि विधिपूर्वक यो पर्व सकिनेछ । ३६ घण्टा लामो निर्जल व्रत शुरु सोमबार बेलुका माटोको चुल्होमा पकाएर तयार पारिएको खिर, रोटी, केरा तथा नुन बिनाको प्रसाद खाएका व्रतालुहरुको ३६ घण्टा लामो निर्जल र निराहार व्रत शुरु भइसकेको छ । हिजो बेलुका पूजा पश्चात खाएको प्रसादको भरमा रहेर व्रत बसेका व्रतालुहरुले अब भोलि बिहान सूर्यलाई अर्घ दिएपछि मात्र अन्न र जल ग्रहण गर्नेछन् । लगातार ३६ घण्टासम्म निर्जल र निराहार भएर गरिने यो व्रत तराईवासीले निकै आश्था र श्रद्धा पूर्वक मनाउने गर्छन् । नदी, पोखरी तथा जलाशयको किनारमा पूजा गर्दै बुधबार बिहान उदाउँदो सूर्यलाई अर्घ दिएर घर फर्केपछि मात्र व्रत समाप्त हुनेछ । तराईमा सबैभन्दा बढी श्रद्धा भक्तिका साथ मनाइने भएकाले यो पर्वलाई महापर्व पनि भनिन्छ । छठ व्रत गर्दा शरीरका रोगहरु नाश हुनुका साथै सन्तान प्राप्ती हुने र परीवारमा सुख शान्ति छाउने विश्वास छ । रौतहट जिल्लाको सदरमुकाम गौर लगायत गंगापिप्रा, शिवनगर, गरुडा, कटहरीया तथा चन्द्रनिगाहपुरका लाखौं व्रतालुहरुले भक्तिभावका साथ आज अस्ताउदो सूर्यलाई अर्घ दिनेछन् । धार्मिक मान्यता चार दिनसम्म चल्ने छठ पर्वको कार्तिक शुक्ल चतुर्थीबाट शुरु भई कार्तिक शुक्ल सप्तमीमा सम्पन्न हुने गर्दछ । त्रेतायुगमा भगवान रामले लंका विजय गरे पछि रामराज्य स्थापनाको दिन कात्तिक शुक्ल षष्ठीका दिन भगवान राम र देवी सीताले व्रत बसेर सूर्य देवको पूजा गरेको र भोलिपल्ट सप्तमीका दिन पुनः बिहान उदाउँदै गरेको सूर्यलाई पूजा गरेर आशीर्वाद लिएकाले सोही दिनमा छठ पूजा गर्ने चलन चलेको पौराणिक मान्यता रहेको छ । छठ व्रतको बारेमा विष्णु पुराण, भागवत पुराण, ब्राहृाावैवर्त पुराण, देवी पुराण आदि प्राचिन धर्म ग्रन्थहरुमा समेत उल्लेख गरिएको छ ।

आज छठ पर्व, छठ मनाउन विभिन्न स्थानका जलाशयमा व्रतालुको घुइचो November 17, 2015     धनुषा जिल्ला कुसमाहा सतोषर धाम को सप्तपोखरि  जलाशयलाई बेहुली झैँ सिँगारिएको छ।  जनकपुर धाम, ३० कात्तिक – शुद्धता र आपसी सद्भावका रुपमा प्रचलित छठ पर्व मनाउन आज मनाइदै छ। पर्व मनाउन विभिन्न स्थानका इतिहास वर्णित जलाशयलाई बेहुली झैँ सिँगारिएको छ।  गङ्गासागर, अरगजा, रुक्मिणी, विहारकुण्ड, दशरथ तलाउ, महाराजसागर, धनुषसागर, रत्नसागर र रामसागरमा मनाइने छठ अत्यन्त मनमोहक हुन्छ । जनकपुरधाममा सबैभन्दा बढी व्रतालु आउने मुख्य ठाउँका रुपमा गङ्गासागर, धनुषसागर र अरगजा पोखरी रहेका छन् । नगरको बीच भागमा रहेका यी पोखरीमा प्रत्येक वर्ष छदेखि १५ हजार छठै तिन र छठका व्रतालुले छठ पर्व गर्ने गरेको अनुमान छ ।  जीवनदायी शक्ति सूर्य देवता र छठी माताको आराधना गरी मनाइने यस पर्वको व्रतलाई कठिन व्रत मानिन्छ । समाजका बूढापाकाका अनुसार यो पर्व आमा, बहिनीले खास गरेर पुत्र पाउने इच्छावश मनाउने गर्छन् भने केहीले पाएको सन्तानको सफल धनधान्य जीवनका लागि मनाउने गर्दछन् ।  मिथिला संस्कृतिमा छठ पूजा गर्ने व्यक्तिले पहिलो दिन अस्ताएको सूर्यलाई नै पूजा गरेर रातभरि जयामा बस्ने गर्दछन् र बिहान उदाउने सूर्यको प्रतिक्षारत रहँदा चढाउने प्रसाद दुई दिनपूर्वदेखि उपवास बसी तयार पार्ने गर्दछन् ।  छठ शब्द ‘षष्ठी शब्दको तद्भव’ रुप हो । षष्ठीका दिन षष्ठीका देवी समेतको पूजा हुने भएकाले यस पर्वको नाम षष्ठी, छठी हुन गएको हो तर अपभ्रंशमा षष्ठी, छठीबाट छठ हुन गएको बुझिन्छ । सूर्यको आरधनाबाट सुख, समृद्धि र सन्तान प्राप्ति एवम् चर्मरोग निको हुने जनविश्वास छ ।  ज्योतिषशास्त्रका आधारमा छठ पर्वको समयमा ब्रह्माण्डमा सूर्य दक्षिणायनतिर हुने भएकाले कन्या राशि समय पर्ने र यस बेलालाई सूर्यको प्रकाश प्रखर तथा प्रभावशाली र मानवका लागि आल्हादकारीसमेत मानिएको छ ।  छठ पर्वमा मुख्य पूजा सूर्यको हुँदाहुँदै षष्ठीका देवीको पूजा पनि हुन्छ । षष्ठीका देवीको पूजा गौण रुपमा हुन्छ । जस्तो राधाकृष्ण, सीताराम, गौरीशङ्कर एकअर्काका पूरक हुन्छन् र एउटाको पूजा गर्दा दुवैका भागमा हुन्छ । षष्ठीका देवीलाई कात्तिकेयकी पत्नी मान्निछ र षष्ठी देवीलाई प्रकृतिको छैटौँ अंश र देवसेना पनि भनिन्छ ।  पौराणिक ग्रन्थमा छ अंश षष्ठी र एक अंश सूर्यलाई मानिएकाले षष्ठीलाई छठमाता र सप्तमीलाई सूर्य मानिन्छ । षष्ठी र सूर्य गरी सात अंश बनेकै कारणले मानव जीवनमा सात अङ्कको अधिक महत्व रहेको छ । संस्कृतिविद् डा राजेन्द्र विमल षष्ठीका दिन बेलुकी अस्ताउन थालेको सूर्यलाई दिइने अर्घ छठमाताको हुन्छ तथा सप्तमीको उदाउँदो सूर्यलाई दिइने अर्घ सूर्यदेवको हुन्छ भन्नुहुन्छ ।  डा विमलका अनुसार मिथिलामा सूर्य पूजाको परम्परा अत्यन्त प्राचीन रहेको छ । सूर्यकै आराधनाबाट याज्ञवल्क्यले ज्ञान प्राप्त गरेका थिए । मानदेवका समयमा विसं ५३८ मा स्थापित सूर्यमूर्ति, नेपाल संवत् १७९ मा नक्सालमा स्थापित सूर्यमूर्ति, नेपाल संवत् १८५ मा पाटनमा स्थापित सूर्यमूर्ति, लिच्छवीकाल उपत्यकामा स्थापित सूर्यमूर्तिले पनि सूर्य पूजा परम्परा रहेको सिद्ध हुन्छ ।

आज छठ पर्व, छठ मनाउन विभिन्न स्थानका जलाशयमा व्रतालुको घुइचो November 17, 2015 धनुषा जिल्ला कुसमाहा सतोषर धाम को सप्तपोखरि जलाशयलाई बेहुली झैँ सिँगारिएको छ। जनकपुर धाम, ३० कात्तिक – शुद्धता र आपसी सद्भावका रुपमा प्रचलित छठ पर्व मनाउन आज मनाइदै छ। पर्व मनाउन विभिन्न स्थानका इतिहास वर्णित जलाशयलाई बेहुली झैँ सिँगारिएको छ। गङ्गासागर, अरगजा, रुक्मिणी, विहारकुण्ड, दशरथ तलाउ, महाराजसागर, धनुषसागर, रत्नसागर र रामसागरमा मनाइने छठ अत्यन्त मनमोहक हुन्छ । जनकपुरधाममा सबैभन्दा बढी व्रतालु आउने मुख्य ठाउँका रुपमा गङ्गासागर, धनुषसागर र अरगजा पोखरी रहेका छन् । नगरको बीच भागमा रहेका यी पोखरीमा प्रत्येक वर्ष छदेखि १५ हजार छठै तिन र छठका व्रतालुले छठ पर्व गर्ने गरेको अनुमान छ । जीवनदायी शक्ति सूर्य देवता र छठी माताको आराधना गरी मनाइने यस पर्वको व्रतलाई कठिन व्रत मानिन्छ । समाजका बूढापाकाका अनुसार यो पर्व आमा, बहिनीले खास गरेर पुत्र पाउने इच्छावश मनाउने गर्छन् भने केहीले पाएको सन्तानको सफल धनधान्य जीवनका लागि मनाउने गर्दछन् । मिथिला संस्कृतिमा छठ पूजा गर्ने व्यक्तिले पहिलो दिन अस्ताएको सूर्यलाई नै पूजा गरेर रातभरि जयामा बस्ने गर्दछन् र बिहान उदाउने सूर्यको प्रतिक्षारत रहँदा चढाउने प्रसाद दुई दिनपूर्वदेखि उपवास बसी तयार पार्ने गर्दछन् । छठ शब्द ‘षष्ठी शब्दको तद्भव’ रुप हो । षष्ठीका दिन षष्ठीका देवी समेतको पूजा हुने भएकाले यस पर्वको नाम षष्ठी, छठी हुन गएको हो तर अपभ्रंशमा षष्ठी, छठीबाट छठ हुन गएको बुझिन्छ । सूर्यको आरधनाबाट सुख, समृद्धि र सन्तान प्राप्ति एवम् चर्मरोग निको हुने जनविश्वास छ । ज्योतिषशास्त्रका आधारमा छठ पर्वको समयमा ब्रह्माण्डमा सूर्य दक्षिणायनतिर हुने भएकाले कन्या राशि समय पर्ने र यस बेलालाई सूर्यको प्रकाश प्रखर तथा प्रभावशाली र मानवका लागि आल्हादकारीसमेत मानिएको छ । छठ पर्वमा मुख्य पूजा सूर्यको हुँदाहुँदै षष्ठीका देवीको पूजा पनि हुन्छ । षष्ठीका देवीको पूजा गौण रुपमा हुन्छ । जस्तो राधाकृष्ण, सीताराम, गौरीशङ्कर एकअर्काका पूरक हुन्छन् र एउटाको पूजा गर्दा दुवैका भागमा हुन्छ । षष्ठीका देवीलाई कात्तिकेयकी पत्नी मान्निछ र षष्ठी देवीलाई प्रकृतिको छैटौँ अंश र देवसेना पनि भनिन्छ । पौराणिक ग्रन्थमा छ अंश षष्ठी र एक अंश सूर्यलाई मानिएकाले षष्ठीलाई छठमाता र सप्तमीलाई सूर्य मानिन्छ । षष्ठी र सूर्य गरी सात अंश बनेकै कारणले मानव जीवनमा सात अङ्कको अधिक महत्व रहेको छ । संस्कृतिविद् डा राजेन्द्र विमल षष्ठीका दिन बेलुकी अस्ताउन थालेको सूर्यलाई दिइने अर्घ छठमाताको हुन्छ तथा सप्तमीको उदाउँदो सूर्यलाई दिइने अर्घ सूर्यदेवको हुन्छ भन्नुहुन्छ । डा विमलका अनुसार मिथिलामा सूर्य पूजाको परम्परा अत्यन्त प्राचीन रहेको छ । सूर्यकै आराधनाबाट याज्ञवल्क्यले ज्ञान प्राप्त गरेका थिए । मानदेवका समयमा विसं ५३८ मा स्थापित सूर्यमूर्ति, नेपाल संवत् १७९ मा नक्सालमा स्थापित सूर्यमूर्ति, नेपाल संवत् १८५ मा पाटनमा स्थापित सूर्यमूर्ति, लिच्छवीकाल उपत्यकामा स्थापित सूर्यमूर्तिले पनि सूर्य पूजा परम्परा रहेको सिद्ध हुन्छ ।

काठमाडौं समाचार औषधि ल्याउन र स्कुल खोल्न दिने मोर्चाको निर्णय प्रकाशित: मंसिर ३, २०७२ मंसिर ३, २०७२- सीमा क्षेत्रमा गरिएको नाकावन्दीले स्वास्थ्य क्षेत्र प्रभावित बनाएपछि संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेसी मोर्चाले औषधि, अक्सिजन र स्वास्थ्य सम्बन्धी उपकरण विराटनगर नाकाबाट ल्याउन दिने निर्णय गरेको छ । साथै विहानको समयमा विद्यालय र क्याम्पसमा कक्षा सञ्चालन हुन दिने मोर्चाले जनाएको छ । बिहीबार बसेको मोर्चा बैठकले दिउसो समयमा विराटनगर नाकाबाट मात्र औषधिजन्य सामग्री ल्याउन दिने निर्णय गरेको हो । प्रमुख तीन दल नेपाली कांग्रेस, एमाले र एमाओवादी मोर्चाको मागप्रति गम्भीर नदेखिएकाले मसिंर ५ गतेदेखि राजमार्ग क्षेत्रमा पूर्ववत यातायात अवरुद्ध लगायतका कार्यक्रम सञ्चालन गर्ने र सीमामा जारी धर्ना यथावत रहने मोर्चाले जनाएको छ ।  हाम्रो समाज वाट…….

काठमाडौं समाचार औषधि ल्याउन र स्कुल खोल्न दिने मोर्चाको निर्णय प्रकाशित: मंसिर ३, २०७२ मंसिर ३, २०७२- सीमा क्षेत्रमा गरिएको नाकावन्दीले स्वास्थ्य क्षेत्र प्रभावित बनाएपछि संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेसी मोर्चाले औषधि, अक्सिजन र स्वास्थ्य सम्बन्धी उपकरण विराटनगर नाकाबाट ल्याउन दिने निर्णय गरेको छ । साथै विहानको समयमा विद्यालय र क्याम्पसमा कक्षा सञ्चालन हुन दिने मोर्चाले जनाएको छ । बिहीबार बसेको मोर्चा बैठकले दिउसो समयमा विराटनगर नाकाबाट मात्र औषधिजन्य सामग्री ल्याउन दिने निर्णय गरेको हो । प्रमुख तीन दल नेपाली कांग्रेस, एमाले र एमाओवादी मोर्चाको मागप्रति गम्भीर नदेखिएकाले मसिंर ५ गतेदेखि राजमार्ग क्षेत्रमा पूर्ववत यातायात अवरुद्ध लगायतका कार्यक्रम सञ्चालन गर्ने र सीमामा जारी धर्ना यथावत रहने मोर्चाले जनाएको छ । हाम्रो समाज वाट…….

सतोषर धाम मिथिला अञ्चल मे एकटा महत्त्वपूर्ण धर्माअस्थलके रुपमे मानल जाएछै ।

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छठ_विषेश  भगवान सूर्यदेव के प्रति भक्तक अटल आस्था केर अनुपम पर्व छठ हिन्दू पंचांगक अनुसारें कार्तिक मास के शुक्ल पक्षक चतुर्थी सँ सप्तमी तिथि धरि मनाओल जैत अछि।  छठ २०१५  १५ नवंबर २०१५ : खाए नहाय  १६ नवंबर २०१५ : खरना  १७ नवंबर २०१५ : साँझक अर्घ १८ नवंबर २०१५ : भोरक अर्घ  छठ के उपासक विधि :  नहाय खाए : छठ पूजा क उपास चारि दिन तक कयल जैत अछि। एकर पहिल दिन नहेबाक-खेबाक विध होइत छै। जाहि में व्यक्ति के घरक सफाई कअ स्वयं शुद्ध हेबाक चाही आ खाली शुद्ध शाकाहारी भोजन करबाक चाही। खरना: एकर दोसर दिन खरना क विध कयल जैत अछि। खरना में व्यक्ति क समूचा दिनक उपास राखि, साँझ म कुसियारक रस या गुड़ सँ बनल चौर क खीर के प्रसादक रूप में खेबाक चाही। अहि दिन बनल गुड़क खीर बहुत पौष्टिक आ स्वादिष्ठ होईत छै।  साँझक अर्घ : तेसर दिन सूर्य षष्ठी के पूरा दिन उपास राखि साँझक समय डूबैत सूर्य के अर्घ्य देबाक लेल पूजाक सामग्रि के लs घाट पर जेबाक चाही। साँझ के सूर्य कें अर्घ्य देबाक पश्चात घर आबि सब समान ओहिना रखबाक चाही। अहि दिन राति में छठी माय के गीत गेबाक चाही आ उपासक कथा सुनबाक चाही।  भोरक अर्घ : एकर पश्चात घर आबि अगिला (चारिम) दिन भोरे-भोर सूर्य निकलई सँ पहिने घाट पर पहुंच जेबाक चाही। उगैत सूर्यक पहील किरण के अर्घ्य देबाक चाही। एकर पश्चात घाट पर छठी माय के गोर लागि हुनका सँ संतानक-रक्षा क वरदान मांगबाक चाही। अर्घ्य देलाक के पश्चात सब में प्रसादक वितरण करबाक चाही आ स्वयं सेहो प्रसाद खा उपासक समापन करबाक चाही।  छठिक मान्यता :  मान्यता अछि कि जे श्रद्धालु अहि महाव्रत के निष्ठा भाव सँ विधिपूर्वक संपन्न करैत छथि संतान सुख सँ कहियो अछूत नै रहैत छथि। अहि महाव्रत के फलस्वरूप व्यक्ति के नै मात्र संतानक प्राप्ति होईत छै बल्कि ओकर सब कष्ट सेहो समाप्त भs जैत छै।  अनुवाद : नीरज मिश्र मुन्नू

छठ_विषेश भगवान सूर्यदेव के प्रति भक्तक अटल आस्था केर अनुपम पर्व छठ हिन्दू पंचांगक अनुसारें कार्तिक मास के शुक्ल पक्षक चतुर्थी सँ सप्तमी तिथि धरि मनाओल जैत अछि। छठ २०१५ १५ नवंबर २०१५ : खाए नहाय १६ नवंबर २०१५ : खरना १७ नवंबर २०१५ : साँझक अर्घ १८ नवंबर २०१५ : भोरक अर्घ छठ के उपासक विधि : नहाय खाए : छठ पूजा क उपास चारि दिन तक कयल जैत अछि। एकर पहिल दिन नहेबाक-खेबाक विध होइत छै। जाहि में व्यक्ति के घरक सफाई कअ स्वयं शुद्ध हेबाक चाही आ खाली शुद्ध शाकाहारी भोजन करबाक चाही। खरना: एकर दोसर दिन खरना क विध कयल जैत अछि। खरना में व्यक्ति क समूचा दिनक उपास राखि, साँझ म कुसियारक रस या गुड़ सँ बनल चौर क खीर के प्रसादक रूप में खेबाक चाही। अहि दिन बनल गुड़क खीर बहुत पौष्टिक आ स्वादिष्ठ होईत छै। साँझक अर्घ : तेसर दिन सूर्य षष्ठी के पूरा दिन उपास राखि साँझक समय डूबैत सूर्य के अर्घ्य देबाक लेल पूजाक सामग्रि के लs घाट पर जेबाक चाही। साँझ के सूर्य कें अर्घ्य देबाक पश्चात घर आबि सब समान ओहिना रखबाक चाही। अहि दिन राति में छठी माय के गीत गेबाक चाही आ उपासक कथा सुनबाक चाही। भोरक अर्घ : एकर पश्चात घर आबि अगिला (चारिम) दिन भोरे-भोर सूर्य निकलई सँ पहिने घाट पर पहुंच जेबाक चाही। उगैत सूर्यक पहील किरण के अर्घ्य देबाक चाही। एकर पश्चात घाट पर छठी माय के गोर लागि हुनका सँ संतानक-रक्षा क वरदान मांगबाक चाही। अर्घ्य देलाक के पश्चात सब में प्रसादक वितरण करबाक चाही आ स्वयं सेहो प्रसाद खा उपासक समापन करबाक चाही। छठिक मान्यता : मान्यता अछि कि जे श्रद्धालु अहि महाव्रत के निष्ठा भाव सँ विधिपूर्वक संपन्न करैत छथि संतान सुख सँ कहियो अछूत नै रहैत छथि। अहि महाव्रत के फलस्वरूप व्यक्ति के नै मात्र संतानक प्राप्ति होईत छै बल्कि ओकर सब कष्ट सेहो समाप्त भs जैत छै। अनुवाद : नीरज मिश्र मुन्नू

छठि व्रत करबाक विधान ———– सँसारक प्रत्येक ठाम मनाओ जाएबला हरेक पावनि तिहारक अपन अपन महत्व रहैत अछि । मूदा सब तरहें छठि पावनि विशिष्ट रहल अछि । जहिया लोकतन्त्र,प्रजातन्त्र या गणतन्त्र शब्द सँ केओ परिचित नई रहल हेताह, ताही समयसँ लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक प्रयोगात्मक रुप सँसार के देखवैत आएल अछि छठि पावनि । किया त मानव सभ्यताक विकाश जहिया सँ शुरु भेल तहिये सँ छठि पावनिके शुभारम्भ भेल बात प्रमाणित भऽ गेल अछि । छठि पावनि मे कायल जायबला हरेक विधानके देखल जाय त ताहिमे लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक सफल प्रयोग भेटत । जकरा समाज या समाजक लोक एक प्रकारे छोडि दैत अछि या कहु कोनो काजक नई मानैत अछि,  तकरा से हो एहि छठि पूजामे उच्च सम्मान देल जाइत अछि । कोन तरहें छठिक हरेक विधि विधान, सँस्कार सँस्कृति मे लोकतन्त्रक प्रयोग, कोनाकऽ ? © सूर्यक आराधना. ………………………… सूर्य प्रत्यक्ष फल देवऽबला देवताक रुप में सगरो पूजित छथि । एहि सँसार मे रहल प्रत्येक सजिवके सूर्य भगवान जीवन दैत छथिन्ह । ताहि कारण सँ सँसार मे सबठाम सूर्यके पूजा कायल जाइत अछि । एकटा प्रसिद्ध कहबि छइ– “उगैत सुरुज के सब प्रणम करैत छैक” या “सब हेओ उगिते सुरुजके प्रणम करैत अछि । ” मूदा छठिमे डुबैत या अस्त होइत सुरुजके सेहो ओतबे निष्ठासँ पूजल जाइत अछि ।  एहिसँ ई स्पष्ट होइत अछि जे प्रजातन्त्र, लोकतन्त्र या गणतन्त्रमे सबहक सँग समान व्यवहार होयबाक चाही से बात छठि पावनि उगैत आ डुबैत सूर्यके पूजाक माध्यम सँ प्रमाणित करैत अछि । छठि व्रत सप्तमी युक्त षष्ठीमे कायल जाइत आछि । सुर्यक पहिल अर्घ ओहि दिन देल जाइत अछि जाहि दिन उदयकालमे कनिओ काल षष्ठी पडैत छैक । तहिना उदय कालमे कनिओ काल सप्तमी रहला पर दोसर अर्घ देल जाइत अछि । छठि पावनिमे सुर्य भगवानक पूजा कायल जएबाक कारणे साँझ मे षष्ठीमे पहिल अर्घ आ प्रातः काल सप्तमीमे दोसर अर्घ देल जाइत अछि । जे वस्तु साँझ में अर्पित काएल जाइत अछि सएह भिनसरमे सेहो । आरोग्य लाभ एहि व्रतक मुख्य उद्देश्य अछि । छठि व्रत कयनिहर सब चौठके नहा कऽ अर्वा¬अर्वाइन खाइत छथि , पंचमी दिन दिनभरि उपवास राखि सायंकाल नव चूूल्हि पर नव कोहामे अरबा चाउरमे गूड दऽ पायसबनबैत छथि तकरा डालीक अनुसार अथवा एके ठाम उत्सर्ग कऽ अपनो खाइत छथि आ प्रसादो बँटैत छथि । षष्ठी दिन व्रत कएनिहार सब साँझक पहर न

छठि व्रत करबाक विधान ———– सँसारक प्रत्येक ठाम मनाओ जाएबला हरेक पावनि तिहारक अपन अपन महत्व रहैत अछि । मूदा सब तरहें छठि पावनि विशिष्ट रहल अछि । जहिया लोकतन्त्र,प्रजातन्त्र या गणतन्त्र शब्द सँ केओ परिचित नई रहल हेताह, ताही समयसँ लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक प्रयोगात्मक रुप सँसार के देखवैत आएल अछि छठि पावनि । किया त मानव सभ्यताक विकाश जहिया सँ शुरु भेल तहिये सँ छठि पावनिके शुभारम्भ भेल बात प्रमाणित भऽ गेल अछि । छठि पावनि मे कायल जायबला हरेक विधानके देखल जाय त ताहिमे लोकतन्त्र, प्रजातन्त्र या गणतन्त्रक सफल प्रयोग भेटत । जकरा समाज या समाजक लोक एक प्रकारे छोडि दैत अछि या कहु कोनो काजक नई मानैत अछि, तकरा से हो एहि छठि पूजामे उच्च सम्मान देल जाइत अछि । कोन तरहें छठिक हरेक विधि विधान, सँस्कार सँस्कृति मे लोकतन्त्रक प्रयोग, कोनाकऽ ? © सूर्यक आराधना. ………………………… सूर्य प्रत्यक्ष फल देवऽबला देवताक रुप में सगरो पूजित छथि । एहि सँसार मे रहल प्रत्येक सजिवके सूर्य भगवान जीवन दैत छथिन्ह । ताहि कारण सँ सँसार मे सबठाम सूर्यके पूजा कायल जाइत अछि । एकटा प्रसिद्ध कहबि छइ– “उगैत सुरुज के सब प्रणम करैत छैक” या “सब हेओ उगिते सुरुजके प्रणम करैत अछि । ” मूदा छठिमे डुबैत या अस्त होइत सुरुजके सेहो ओतबे निष्ठासँ पूजल जाइत अछि । एहिसँ ई स्पष्ट होइत अछि जे प्रजातन्त्र, लोकतन्त्र या गणतन्त्रमे सबहक सँग समान व्यवहार होयबाक चाही से बात छठि पावनि उगैत आ डुबैत सूर्यके पूजाक माध्यम सँ प्रमाणित करैत अछि । छठि व्रत सप्तमी युक्त षष्ठीमे कायल जाइत आछि । सुर्यक पहिल अर्घ ओहि दिन देल जाइत अछि जाहि दिन उदयकालमे कनिओ काल षष्ठी पडैत छैक । तहिना उदय कालमे कनिओ काल सप्तमी रहला पर दोसर अर्घ देल जाइत अछि । छठि पावनिमे सुर्य भगवानक पूजा कायल जएबाक कारणे साँझ मे षष्ठीमे पहिल अर्घ आ प्रातः काल सप्तमीमे दोसर अर्घ देल जाइत अछि । जे वस्तु साँझ में अर्पित काएल जाइत अछि सएह भिनसरमे सेहो । आरोग्य लाभ एहि व्रतक मुख्य उद्देश्य अछि । छठि व्रत कयनिहर सब चौठके नहा कऽ अर्वा¬अर्वाइन खाइत छथि , पंचमी दिन दिनभरि उपवास राखि सायंकाल नव चूूल्हि पर नव कोहामे अरबा चाउरमे गूड दऽ पायसबनबैत छथि तकरा डालीक अनुसार अथवा एके ठाम उत्सर्ग कऽ अपनो खाइत छथि आ प्रसादो बँटैत छथि । षष्ठी दिन व्रत कएनिहार सब साँझक पहर न