लिटरेचर इन इंडिया

हिंदी साहित्य: आदिकाल

हिंदी साहित्य: आदिकाल

आदिकाल सन 1000 से 1325 तक हिंदी साहित्य के इस युग को यह नाम डॉ॰ हजारी प्रसाद द्विवेदी से मिला है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल तथा विश्वनाथ प्रसाद मिश्र ने इसे वीर-गाथा काल नाम दिया है। इस काल की समय के आधार पर साहित्य का इतिहास लिखने वाले मिश्र बंधुओं ने इसका नाम प्रारंभिक काल किया […]

Continue reading
सनातन नदी : अनाम धीवर

सनातन नदी : अनाम धीवर

भगवान् बुद्ध जब तरुण थे, जब उनकी तरुण प्रज्ञा काम, क्रोध, मोह के प्रति निरन्तर खड्गहस्त थी, तो उन्होंने उरुवेला में शिष्यों को पावक-दीप्त उपदेश दिया था, ‘भिक्षुओ, आँखें जल रही हैं, यह सारा दृश्यमान जगत जल रहा है, देवलोक जल रहा है, यह जन्मान्तर प्रवाह जल रहा है। भिक्षुओ, यह कौन-सी सर्वभक्षी आग है […]

Continue reading
सच बोलना ही कविता है !

सच बोलना ही कविता है !

प्रिय पुतुल, एक लंबे अंतराल के बाद तुम्‍हें पत्र लिखने चला हूँ। तुमने विगत पत्र में गांधीजी की साहित्‍य-दृष्टि के संबंध में कुछ लिखने को कहा था। देख पुतुल, गांधी जी कर्मयोगी थे। उन्‍होंने इस विषय पर अलग से कभी भी माथा-पच्‍ची नहीं की। परंतु जीवन-भर वे इस विषय के संदर्भ में यत्र-तत्र कहते रहे […]

Continue reading
भाषा बहता नीर

भाषा बहता नीर

‘भाषा बहता नीर’। भाषा एक प्रवाहमान नदी। भाषा बहता हुआ जल। बात बावन तोले पाव रत्ती सही। कबीर की कही हुई है तो सही होनी ही चाहिए। कबीर थे बड़े दबंग और उनका दिल बड़ा साफ था। अतः इस बात के पीछे उनके दिल की सफाई और सहजता झाँकती है, इससे किसी को भी एतराज […]

Continue reading
निषाद बाँसुरी

निषाद बाँसुरी

सप्तमी का चाँद कब का डूब चुका है। आधी रात हेल गयी है। सारा वातावरण ऐसा निरंग-निर्जन पड़ गया है गोया यह शुक्ला सप्तमी न होकर शुद्ध नष्ट-चंद्र निशा हो। अभी-अभी हमारी नाव ‘झिझिरी’ अर्थात् नौका-विहार खेलकर लौटी है। नाव को तट से बाँधकर चंदर भाई फिर ‘गलई’ अर्थात इसके अग्रभाग पर आ विराजते हैं […]

Continue reading
कुब्जा-सुंदरी

कुब्जा-सुंदरी

हमारे दरवाज़े की बगल में त्रिभंग-मुद्रा में एक टेढ़ी नीम खड़ी है, जिसे राह चलते एक वैष्णव बाबा जी ने नाम दे दिया था, ‘कुब्जा-सुंदरी’। बाबा जी ने तो मौज में आकर इसे एक नाम दे दिया था, रात भर हमारे अतिथि रहे, फिर ‘रमता योगी बहता पानी’! बाद में कभी भेंट नहीं हुई। परन्तु […]

Continue reading
उत्तराफाल्गुनी के आसपास

उत्तराफाल्गुनी के आसपास

वर्षा ऋतु की अंतिम नक्षत्र है उत्तराफाल्गुनी। हमारे जीवन में गदह-पचीसी सावन-मनभावन है, बड़ी मौज रहती है, परंतु सत्ताइसवें के आते-आते घनघोर भाद्रपद के अशनि-संकेत मिलने लगते हैं और तीसी के वर्षों में हम विद्युन्मय भाद्रपद के काम, क्रोध और मोह का तमिस्त्र सुख भोगते हैं। इसी काल में अपने-अपने स्वभाव के अनुसार हमारी सिसृक्षा […]

Continue reading
हिंदी साहित्य का इतिहास एवं काल विभाजन

हिंदी साहित्य का इतिहास एवं काल विभाजन

साहित्य के इतिहास साहित्य के इतिहास का अध्ययन विविध समयों की परिस्थितियों और प्रवृत्तियो के आधार पर किया जाता है इसलिए काल विभाजन की प्रक्रिया द्वारा प्रत्येक काल की सीमा का निर्धारण किया जाता है. विभिन्न युगों में साहित्यिक प्रवृत्तियों की शुरुआत, उनका उतार चढाव उनकी सीमा का निर्धारण करती हैं परन्तु इसका अर्थ यह […]

Continue reading
वो पुलिस अफ़सर जिसने राष्ट्रपति का काफ़िला रोक दिया!

वो पुलिस अफ़सर जिसने राष्ट्रपति का काफ़िला रोक दिया!

आमतौर पर यह देखा जाता है कि मंत्री के काफ़िले को लेकर अफ़सरों की भौंहे तनी रहती है तो फिर सोचिये एक राष्ट्रपति का काफ़िला अगर किसी पुलिस कर्मी ने रोक दिया तो कितने साहस की बात है| लेकिन इसके पीछे की वजह जान कर आप भी इस पुलिस अफ़सर को शाबाशी देंगे| दरअसल मेट्रो […]

Continue reading
एक ट्वीट पर इलाहाबाद पुलिस ने हटवाया अवैध कब्ज़ा

एक ट्वीट पर इलाहाबाद पुलिस ने हटवाया अवैध कब्ज़ा

इलाहाबाद के थाना-सरायममरेज के अंतर्गत देवा गाँव की मीरा देवी को उनके ही पड़ोसी आये दिन परेशान करते है और उनके साथ मारपीट की घटना को भी अंजाम दे चुके है|दरअसल मीरा देवी और उनके पुत्र के अनुसार उनका और उनके पड़ोसी का ज़मीन सम्बन्धी विवाद लम्बे समय से चला आ रहा है| उक्त सम्बन्ध […]

Continue reading
माँ, माँ थी वह

माँ, माँ थी वह

तक़रीबन दो-ढाई साल पहले मैं अपने आप में बहुत व्यस्त रहा करता था। मुझे मार्केटिंग लाइन में नौकरी मिली थी। मैं सुबह 9 बजे के आस पास घर से निकल जाता था और शाम में कब वापस आता इसकी किसी को कोई ख़बर नही रहती थी। हालाकि मुझे मार्केटिंग लाइन में पैसे अच्छे मिलते थे […]

Continue reading
पुस्तक समीक्षा: नमक स्वादानुसार

पुस्तक समीक्षा: नमक स्वादानुसार

जीवन में नमक की जितनी आवश्यकता है उससे कहीं ज्यादे जरूरी है उसका संतुलित होना. मतलब कि व्यक्ति के जरूरत के हिसाब से होना. नमक की मात्र थोड़ी कम या अधिक हुई नहीं कि आपका जायका बिगड़ जाएगा. जी हां, निखिल सचान की पहली किताब “नमक स्वादानुसार” भी कुछ इसी तरीके के साथ प्रस्तुत किया […]

Continue reading
खुलासा: कांग्रेस की साजिश है मंदसौर किसान आन्दोलन, पूरी प्लानिंग के तहत हुआ उपद्रव

खुलासा: कांग्रेस की साजिश है मंदसौर किसान आन्दोलन, पूरी प्लानिंग के तहत हुआ उपद्रव

भारत के दिल में बसा मध्यप्रदेश इन दिनों सुलग रहा है| शिवराज सरकार पर संकट के बादल छाये हुए है, कारण है उग्र हो छुआ किसान आन्दोलन| उग्र हो चुके आन्दोलन को शांत करने हेतु मध्यप्रदेश पुलिस और सीआरपीएफ़ को तथाकथित रूप से गोली चलानी पड़ी जिसमे ६ किसानो की मौत हो गयी| मध्यप्रदेश आखिर […]

Continue reading
लिंगभेदी मानसिकता की वजह से कम हो रही हैं बेटियां

लिंगभेदी मानसिकता की वजह से कम हो रही हैं बेटियां

  हम एक लिंगभेदी मानसिकता वाले समाज हैं जहां लड़कों और लड़कियों में फर्क किया जाता है।यहाँ लड़की होकर पैदा होना आसान नहीं है और पैदा होने के बाद एक औरत के रूप में जिंदा रखना  भी उतना ही चुनौतीपूर्ण है। यहां बेटी पैदा होने पर अच्छे खासे पढ़े लिखे लोगों की ख़ुशी काफूर हो […]

Continue reading
किसान आंदोलन और गांधी-टैगोर डिबेट

किसान आंदोलन और गांधी-टैगोर डिबेट

किसान आंदोलन चल रहा है। आंदोलन महाराष्ट्र से शुरू हुआ था और अब इसने मध्यप्रदेश को अपनी गिरफ़्त में ले लिया है। आंदोलनकारियों की अनेक मांगें हैं, जिनमें कर्जमाफ़ी जैसी अनैतिक मांग भी शामिल है। आंदोलनकारी किसानों ने आपूर्ति तंत्र को अपहृत कर लिया है। दूध, फल और सब्ज़ियों के उत्पादन और वितरण के “मैकेनिज़्म” […]

Continue reading
लगभग 5000 कत्लेआम को सब लोग ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से जानते हैं

लगभग 5000 कत्लेआम को सब लोग ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से जानते हैं

लगभग 5000 सिख महिलाएं ,बच्चों ,बूढ़े , जवान और सेवादारों के कत्लेआम को आज 33 साल हो गए। इसे आप सब लोग ऑपरेशन ब्लू स्टार के नाम से जानते हैं। इंदिरा गांधी की सरकार ने खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह भिंडरावाले और उनके समर्थकों के खिलाफ ये ऑपरेशन चलाया था, जिसमें उनके 200 लोगों ने सरेंडर […]

Continue reading
मैं नैन्सी की लाश बोल रही हूँ…

मैं नैन्सी की लाश बोल रही हूँ…

पूरी रात सो न सका वो विभत्स मंज़र देख कर, सोचा कि अगर नैन्सी सच में आज कुछ लिख पाती तो यही लिखती: नमस्कार! मैं नैन्सी की लाश बोल रही हूँ… श्श्श्श…आत्मा। मैं तो लाश थी… सड़ गयी पर आख़िर कैसे आप सभी का ज़मीर सड़ गया? मैं अपने पापा की गुड़िया थी…अम्माँ की परी…लेकिन […]

Continue reading
मांसभक्षियों के कुतर्क : 3

मांसभक्षियों के कुतर्क : 3

“पेड़-पौधों में भी तो जीवन होता है।” ## यह मांसभक्षियों का सबसे प्रिय तर्क है। और मज़े की बात यह है कि मांसभक्षियों को यह भी नहीं पता कि यह एक “आत्मघाती” तर्क है, यानी यह तर्क स्वयं की ही काट करता है। ज़ाहिर है, मांसभक्षण से “प्रोटीन” मिले या ना मिले, “तर्कक्षमता” तो अवश्य […]

Continue reading
मांसभक्षियों के कुतर्क : 2

मांसभक्षियों के कुतर्क : 2

_______________________________________________ [ मेरी मंशा है कि शृंखलाबद्ध रूप से मांसभक्षियों के कुतर्कों का एक-एक कर उच्छेदन किया जाए। उसी कड़ी में यह ] *** कुतर्क : “मनुष्य की हत्या की तुलना पशु की हत्या से नहीं की जा सकती, क्योंकि मनुष्य पशुओं से श्रेष्ठ है।” ## यह मांसभक्षियों का प्रिय तर्क है। आश्चर्य होता है […]

Continue reading
मांसभक्षियों का तर्क

मांसभक्षियों का तर्क

“सरकार यह कैसे तय करेगी कि हम क्या खाएं और क्या नहीं.” अत्यंत वीभत्स, धूर्ततापूर्ण तर्क! यह ठीक वैसे ही है, जैसे हत्यारों द्वारा यह कहना कि सरकार कैसे तय करेगी कि हम किसको मारें और किसको नहीं. या बलात्कारियों द्वारा यह कहना कि यह सरकार कैसे तय करेगी कि हम किसके साथ बलात् यौनाचार […]

Continue reading