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श्री गणपति 108 नामावली

श्री गणपति 108 नामावली

1) ऊँ श्री गणेश्वराय नम: 2) ऊँ श्री गणाध्यक्षाय नम: 3) ऊँ श्री गणप्रियाय नम: 4) ऊँ श्री गणनाथाय नम: 5) ऊँ श्री गणेशाय नम: 6) ऊँ श्री गणपतये नम: 7) ऊँ श्री गणेधीशाय नम: 8) ऊँ श्री गणप्रभवे नम: 9) ऊँ श्री गणस्तुताय नम: 10) ऊँ श्री गुणाप्रियाय नम: 11) ऊँ श्री गौणशरीराय नम: […]

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आनन्दलहरी

आनन्दलहरी

भवानि स्तोतुं त्वां प्रभवति चतुर्भिनं वदनै: प्रजानामीशानस्त्रिपुरमथन: पंचभिरपि। न  षड्भि: सेनानीर्दशशतमुखैरप्यहिपति- स्तदान्येषां केषां कथय कथमस्मिन्नवसर:।।1।।   घृतक्षीरद्राक्षामधुमधुरिमा कैरपि       पदै- र्विशिष्यानाख्येयो भवति रसनामात्रविषय:। तथा ते सौन्दर्य परमशिवदृड्मात्रविषय: कथकांरं     ब्रूम:    सकलनिगमागोचरगुणे।।2।।   मुखे   ते   ताम्बूलं   नयनयुगले   कज्जलकला ललाटे काश्मीरं विलसति गले मौक्तिकलता। स्फुरत्कांची  शाटी  पृथुकटितटे  हाटकमयी भजामि त्वां गौरीं नगपतिकिशोरीमविरतम् ।।3।।   विराजन्मन्दारद्रुमकुसुमहारस्तनतटी नदद्वीणानादश्रवणविलसत्कुण्डलगुणा। नतांगी  मातंगीरुचिरगतिभंगी  भगवती […]

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षट्पदी स्तोत्रं

षट्पदी स्तोत्रं

अविनयमपनय विष्णो दमय मन: शमय विषयमृगतृष्णाम्। भूतदयां     विस्तारय      तारय             संसारसागरत:।।1।। अर्थ – हे विष्णु भगवान! मेरी उद्दण्डता दूर कीजिए, मेरे मन का दमन कीजिए और विषयों की मृगतृष्णा को शान्त कर दीजिए, प्राणियों के प्रति मेरा दयाभाव बढ़ाइए और इस संसार-समुद्र से मुझे पार लागाइए.   दिव्यधुनीमकरन्दे              परिमलपरिभोगसच्चिदानन्दे। श्रीपतिपदारविन्दे      भवभयखेदच्छिदे               वन्दे।।2।। अर्थ – भगवान लक्ष्मीपति […]

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पार्वती स्तुति:

पार्वती स्तुति:

ब्रह्मादय ऊचु: त्वं माता जगतां पितापि च हर: सर्वे इमे बालका-स्तस्मात्त्वच्छिशुभावत: सुरगणे नास्त्येव ते सम्भ्रम:। मातस्त्वं शिवसुन्दरि त्रिजगतां लज्जास्वरूपा यत-स्तस्मात्त्वं जय देवि रक्ष धरणीं गौरि प्रसीदस्व न:।।1।।   त्वमात्मा   त्वं  ब्रह्म      त्रिगुणरहितं   विश्वजननि  स्वयं   भूत्वा   योषित्पुरुषविषयाहो    जगति  च। करोष्येवं    क्रीडां     स्वगुणवशतस्ते     च    जननीं वदन्ति  त्वां  लोका:  स्मरहरवरस्वामिरमणीम्।।2।।   त्वं स्वेच्छावशत:  कदा  प्रतिभवस्यंशेन शम्भु: पुमा-न्स्त्रीरूपेण शिवे […]

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शनि सहस्त्रनाम स्तोत्र

शनि सहस्त्रनाम स्तोत्र

जब कभी शनि की दशा/अन्तर्दशा में अकारण चिन्ताएँ होने लगे अथवा कार्य बाधा होने लगे तब श्रद्धा तथा विश्वास के साथ शनि सहस्त्रनाम का पाठ करना चाहिए इसलिए शनि पीड़ा शांत होगी. शनि सहस्त्रनाम का अर्थ है – शनि देव के हजार नाम. शनि के एक हजार नामों का श्लोकबद्ध वर्णन किया गया है. जो […]

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श्रीमृत्युंजयस्तोत्रम्

श्रीमृत्युंजयस्तोत्रम्

रत्नसानुशरासनं रजताद्रिश्रृंगनिकेतनं शिंजिनीकृतपन्नगेश्वरमच्युतानलसायकम्। क्षिप्रदग्धपुरत्रयं त्रिदशालयैरभिवन्दितं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:।।1।।   पंचपादपपुष्पगन्धिपदाम्बुजद्वयशोभितं भाललोचनजातपावकदग्धमन्मथविग्रहम्। भस्मदिग्धकलेवरं भवनाशिनं भवमव्ययं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:।।2।।   मत्तवारणमुख्यचर्मकृतोत्तरीय़मनोहरं पंकजासनपद्मलोचनपूजिताड्घ्रिसरोरुहम्। देवसिद्धतरंगिणीकरसिक्तशीतजटाधरं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:।।3।।   कुण्डलीकृतकुण्डलीश्वरकुण्डलं वृषवाहनं नारदादिमुनीश्वरस्तुतवैभवं भुवनेश्वरम्। अन्धकान्तकमाश्रितामरपादपं शमनान्तकं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यम:।।4।।   यक्षराजसखं भगाक्षिहरं भुजंगविभूषणं शैलराजसुतापरिष्कृतचारुवामकलेवरम्। क्ष्वेडनीलगलं परश्वधधारिणं मृगधारिणं चन्द्रशेखरमाश्रये […]

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सप्तश्लोकी गीता

सप्तश्लोकी गीता

ओमित्येकाक्षरं ब्रह्म व्याहरन्मामनुस्मरन्। य: प्रयाति त्यजन्देह स याति परमां गतिम्।।1।।   स्थाने हृषीकेश तव प्रकीर्त्या जगत्प्रहृष्यत्यनुरज्यते च । रक्षांसि भीतानि दिशो द्रवन्ति सर्वे नमस्यन्ति च सिद्धसंघा:।।2।।   सर्वत:पाणिपादं तत्सर्वतोSक्षिशिरोमुखम् । सर्वत:श्रुतिमल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति ।।3।।   कविं पुराणमनुशासितारमणोरणीयांसमनुस्मरेद्य: । सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्णं  तमस: परस्तान्।।4।।   ऊर्ध्वमूलमध:शाखमश्वत्थं प्राहुरव्ययम्। छन्दांसि यस्य पर्णानि यस्तं वेद स वेदवित्।।5।।   सर्वस्य चहं […]

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श्रीमदाद्यशंकराचार्यकृत – श्रीहनुमत्पंचरत्न स्तोत्रम्

श्रीमदाद्यशंकराचार्यकृत – श्रीहनुमत्पंचरत्न स्तोत्रम्

इस स्तोत्र के जाप से पूर्व हनुमान जी के चित्र का इंतजाम कर लेना चाहिए क्योंकि उनके चित्र अथवा मूर्त्ति के सामने दीया जलाकर ही पाठ किया जाना चाहिए. स्वच्छ आसन ग्रहण कर के हनुमान जी का षोडशोपचार पूजन करना चाहिए. इस स्तोत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से व्यक्ति के सारे मनोरथ पूर्ण होते हैं. […]

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स्कन्द पुराणोक्त शनि स्तोत्र

स्कन्द पुराणोक्त शनि स्तोत्र

शनि कई बार गोचरवश अथवा अपनी दशा/अन्तर्दशा में कष्ट प्रदान करते हैं, ऎसे में जातक को घबराने की बजाय शनि महाराज को प्रसन्न करने के विषय में सोचना चाहिए ताकि वह अपने अशुभ प्रभावों में कमी कर सकें. वैसे तो शास्त्रों में शनि संबंधित बहुत से मंत्र, कवच अथवा स्तोत्र दिए गए हैं लेकिन यहाँ […]

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तुलसीदासकृत हनुमानाष्टक

तुलसीदासकृत हनुमानाष्टक

तत: स तुलसीदास: सस्मार रघुनन्दनं । हनुमन्तं तत्पुरस्तात् तुष्टाव भक्त रक्षणं ।।1।।   धनुर्वाणो धरोवीर: सीता लक्ष्मण संयुत: । रामचन्द्र सहायो मां किं करिष्यत्ययं मम ।।2।।   हनुमान् अंजनीसूनुर्वायुपुत्र महाबल: । महालाड्गूल चिक्षपेनिहताखिल राक्षस: ।।3।।   श्रीरामहृदयानन्द विपत्तौ शरणं तव । लक्ष्मणो निहते भूमौ नीत्वा द्रोणचलं यतम्।।4।।   यथा जीवितवानद्य तां शक्तिं प्रच्चटी कुरु । […]

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दशरथकृत शनि स्तवन

दशरथकृत शनि स्तवन

  शनि की पीड़ा से मुक्ति के अकसर लिए दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करने का परामर्श दिया जाता है. यदि इस शनि स्तोत्र के साथ दशरथकृत शनि स्तवन का पाठ भी किया जाए तो अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है. यहाँ स्तवन का तात्पर्य – अत्यन्त विनम्र भाव से पूरी तरह समर्पित होकर शनि देव […]

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श्रीशनि व शनिभार्या स्तोत्र

श्रीशनि व शनिभार्या स्तोत्र

  श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र एक दुर्लभ पाठ माना गया है, शनि के अन्य स्तोत्रों के साथ यदि इस दुर्लभ स्तोत्र का पाठ भी किया जाए तो खोया हुआ साम्राज्य भी पुन: प्राप्त किया जा सकता है. राजा नल ने इस श्रीशनि एवं शनिभार्या स्तोत्र का नियमित रुप से पाठ किया और अपना छीना हुआ […]

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शनि कवच

शनि कवच

शनि ग्रह की पीड़ा से बचने के लिए अनेकानेक मंत्र जाप, पाठ आदि शास्त्रों में दिए गए हैं. शनि ग्रह के मंत्र भी कई प्रकार हैं और कवच का उल्लेख भी मिलता है. युद्ध क्षेत्र में जाने से पूर्व सिपाही अपने शरीर पर एक लोहे का कवच धारण करता था ताकि दुश्मनों के वार से […]

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श्रीशनि वज्रपंजर कवच

श्रीशनि वज्रपंजर कवच

आधुनिक समय में हर व्यक्ति शनि के नाम से भयभीत रहता है. इसका कारण शनि के विषय में फैली गलत भ्राँतियाँ भी हैं. शनि ग्रह किसी व्यक्ति को कैसे फल देगा, ये जन्म कुंडली में शनि की स्थिति तथा योगों पर निर्भर करता है. कई बार योगकारी होते भी अपनी दशा/अन्तर्दशा में शनि पूरे फल […]

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श्रीगणपतिनमस्कार:

श्रीगणपतिनमस्कार:

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय। नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषितायगौरीसुताय गणनाय नमो नमस्ते।।1।। गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्। उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।।2।। एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्। विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम।।3।। रक्ष रक्ष गणाध्यक्ष रक्ष त्रैलोक्यरक्षक। भक्तानामभयं कर्ता त्राता भव भवार्णवात्।।4।। ।।इति श्रीगणपतिनमस्कार: सम्पूर्ण:।।

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देवीस्तुति:

देवीस्तुति:

देवीस्तुति में देवी की स्तुति की गई है अर्थात उनकी वंदना की गई है. उनके अनेको रुपों को बारम्बार नमस्कार किया गया है.  इस देवीस्तुति का नित्य पाठ करने से व्यक्ति पर महादेवी की कृपा सदा बनी रहती है, वैसे भी माँ अपने भक्त की पुकार सुनकर शीघ्र ही पिघल जाती है. ध्यानम् – Dhyanam […]

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रेवती नक्षत्र और व्यवसाय

रेवती नक्षत्र और व्यवसाय

  रेवती नक्षत्र का विस्तार मीन राशि में 16 अंश(Degree) 40 कला(Minute) से लेकर 30 अंश तक रहता है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र के अन्तर्गत सम्मोहन करने वाले, प्रेतों से संपर्क साधने वाले, कलाकार जैसे – चित्रकार, अभिनेता, नट, विदूषक, संगीतज्ञ आते हैं, भाषाविद, जादूगर, घड़ी साज, रेल […]

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उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और व्यवसाय

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और व्यवसाय

उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का विस्तार मीन राशि में 3 अंश 20 कला से लेकर 16 अंश 40 कला तक रहता है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र में ध्यान तथा योग कराने वाले विशेष व्यक्ति आते हैं. रोग निदान व चिकित्सा विशेषज्ञ, सलाहकार, आध्यात्मिक चिकित्सक, तांत्रिक, दिव्य पुरुष, योगी, तपस्वी, वन […]

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पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और व्यवसाय

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र और व्यवसाय

पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र का विस्तार कुंभ राशि में 20 अंश से आरंभ होकर मीन राशि में 3 अंश 20 कला तक रहता है. इस नक्षत्र कके अन्तर्गत निम्नलिखित व्यवसाय आते हैं :- इस नक्षत्र में दाह संस्कार अथवा मृत्यु व मृतक संस्कार से जुड़े सारे लोग आते हैं जैसे कफन बेचने तथा बनाने वाले, शव वाहन […]

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शतभिषा नक्षत्र और व्यवसाय

शतभिषा नक्षत्र और व्यवसाय

शतभिषा नक्षत्र का विस्तार कुंभ राशि में 6 अंश(Degree) 40 कला(Minute) से 20 अंश तक रहता है. इस नक्षत्र के अन्तर्गत आने वाले व्यवसाय निम्नलिखित हैं :- इस नक्षत्र में बिजली का काम करने वाले कारीगर, इलैक्ट्रिशियन, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ(Technology Expert), रडार तथा “क्ष” किरण(X-Ray) विशेषज्ञ, कीमोथेरेपी वाले चिकित्सक, अंतरिक्ष यात्री, अंतरिक्ष विज्ञानी, अंतरिक्ष की खोज, […]

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