ANTARNAAD - अंतर्नाद

Use Bhi

Use Bhi

उसे भी राशन की कतारों में खड़ा होना था, उसे भी अम्मी की दुलारों में बड़ा होना था । उसकी हाथों में जुर्म के शरार थे किसके, उसकी बातों में झूठ ये हजार थे किसके, उसकी रातों से नींदें जो फरार थे किसके, उसकी आँखों में सारे कारोबार थे किसके ।  उसे भी कॉलेज की […]

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Phir Swar Se Swar Ka

Phir Swar Se Swar Ka

फिर स्वर से स्वर का अनबन होगा, वे अंतर-बल को तोड़ेंगे, फिर कल्पित लक्ष्य से असंगत पथ में, मिथ्या दंभ को जोड़ेंगे, फिर सुख-दुःख के कई भाग बटेंगे, कितने कृत्य को मोड़ेंगे, फिर सुबह से लेकर साँझ तक हम-तुम, निंद्य के वृत्त में दौड़ेंगे । फिर बादल के कण अदृष्ट गगन में, निर्जल नीरस विचरेंगे, […]

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Antar Pal Ka

Antar Pal Ka

अंतर पल का, अंतर कल का, अनिर्णीत तो इसमें क्या छल ? तुम्हें बताना, तुम्हें सुनाना, शिल्पनिर्मित हो शेष कहाँ बल ? पग-पग, डग-डग, लक्ष्य बदल कर, अपरिचित पथ में सुदूर तक चल कर, पल-पल बोझिल, प्राण विकल कर, तुम्हारी हर एक, बसंत नवल कर, अंत-रहित तो इसमें क्या खल ? पथ-भ्रमित तो इसका क्या […]

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Need Ka Nirman

Need Ka Nirman

नीड़ का निर्माण फिर-फिर, नेह का आह्णान फिर-फिर!   वह उठी आँधी कि नभ में छा गया सहसा अँधेरा, धूलि धूसर बादलों ने भूमि को इस भाँति घेरा,   रात-सा दिन हो गया, फिर रात आ‌ई और काली, लग रहा था अब न होगा इस निशा का फिर सवेरा,   रात के उत्पात-भय से भीत […]

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Wazood Badla Hain

Wazood Badla Hain

वज़ूद बदला हैं, पहचान बदला हैं, कोई इंसान कहता हैं, भगवान बदला हैं । तबाही अच्छी-खासी हैं, अक़्सर नाम बदलती हैं, अंजाम एक से हैं सब, पर इंसान बदलती हैं । यकीन बदला हैं, इन्साफ बदला हैं, कोई इल्ज़ाम कहता हैं, तमाम बदला हैं । ज़ुबानें उठती-गिरती हैं, जो पहचान बदलती हैं, इल्ज़ाम एक से […]

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Ki Bad-Khwabi Hain

Ki Bad-Khwabi Hain

कि बद-ख्वाबी हैं, बेकसी हैं, या बेवजूद हैं हवाएँ, क्यों इन दरख्तों के पत्तों से कोई दुआ नहीं आती, तूफां उठे तो कितनी देर तक, कितनी दूर तक चले, तिनकों और पत्थरों के शहर में इंतेहां नहीं जाती ।   जो टूट के गिरे बादल तो एक फरमान ये समझो, कि जुर्म कोई हो इस […]

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Kuch Na Kuch Hoga

Kuch Na Kuch Hoga

मेरी जानिब से ग़ैरों ने लगाया कुछ न कुछ होगा, न आया वो तो उसके जी में आया कुछ न कुछ होगा । लड़े है मैकदे में आज जो यूं शीशा – ओ – सागर, करिश्मा चश्मे-साक़ी ने दिखाया कुछ न कुछ होगा । न ढूंढ़ा और न पाया हमने कुछ इस बह् रे-हस्ती में, […]

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Uske Ghar Tum

Uske Ghar Tum

उसके घर तुम कभी नहीं जाना, वो ईमान पूजता हैं, वो न अल्लाह, वो न ईसा को, वो न राम पूजता हैं ।   वो बेनसीब, वो हैं हारा-भटका, वो आराम ढूँढ़ता हैं, हम सब जाने अपने रस्ते-मंजिल, वो नाकाम ढूँढ़ता हैं ।   मिट्टी ही उसको चाँदी-सोना, वो न दाम देखता हैं, हम ज़रदारी, […]

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Nahi Haar

Nahi Haar

नहीं हार, नहीं हार, तू जीवन-रण ना हार, सूरज लाख तपे भूमि से, नहीं सके हैं जार, नहीं हार, नहीं हार, तू देख नदी जलधार, पर्वत लाख काटे सरि-पथ, रोक सके ना धार। नहीं हार, नहीं हार, तू जीवन-पथ ना डार, सागर बढ़े कोटि-कोटि डग, फिर भी मिले किनार, नहीं हार, नहीं हार, तू धीरज […]

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Hum Le Ke Apna

Hum Le Ke Apna

हम ले के अपना माल जो मेले में आ गए, सारे दुकानदार दुकानें बढ़ा गए | बस्ती के क़त्ले आम पे निकली न आह भी, ख़ुद को लगी जो चोट तो दरिया बहा गए | दुनिया की शोहरतें हैं उन्हीं के नसीब में, अंदाज़ जिनको बात बनाने के आ गए | फ़नकार तो ज़माने मे […]

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Maqsad Kuchh Aur Nahi

Maqsad Kuchh Aur Nahi

मक़सद कुछ और नहीं बस एक तमाशा खड़ा करना हैं, हम आज़ाद हैं इस आज़ादी का बियाबां बयां करना हैं । करोड़ों के घर रोज़ फाके चले मगर हमें कहाँ लड़ना हैं, बेवज़ह कहीं जंग-ओ-जदल की फ़र्ज़ पर अड़ा रहना हैं । जहाँ मंदिर बने, वहीँ मस्जिद बने, किसे आगे यहाँ बढ़ना हैं, न भगवान मिले, […]

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Zindagi Ki Doud Dekhein

Zindagi Ki Doud Dekhein

अब आईये कुछ और देखें, ज़िन्दगी की दौड़ देखें, चाहे दुनिया जिस मुताबिक, आदमी का गौर देखें ॥   हर रास्तों के बाद रस्तें, रास्तों का छोर देखें, क्या जाने-परखें दायरों को, बेनाम ही हो मोड़ देखें ॥   गलतियों का वज़ूद वाजिब, खामियों की ओर देखें, जो सच दबे झूठ की खातिर, हामियों की […]

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Ab In Houslon Ke Shakh

Ab In Houslon Ke Shakh

अब इन हौसलों के शाख काट कर फेंक दो, नये शाख निकलेंगे तो शायद कोई सबक होगा, बरसों से दिये और मोम जलकर राख हुए हैं, ये सोचकर कि हवाओं में सुकून का महक होगा । कि दीवारों और चट्टानों से बचाव मुमकिन नहीं, जब वक़्त के गुनाहों का ये दरिया समन्दर होगा, अपने नक़ाब […]

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Phir Koi Ummeed Bane

Phir Koi Ummeed Bane

फिर कोई उम्मीद बने, हौसला दराज़ मुमकिन हो, ख़ल्क़ से दौर चले, रात के आखिर फिर दिन हो। फिर एक तारीख बने, रंज-ओ-तक़सीम मुश्किल हो, कारवां फिर से चले, हर एक मोड़ अब मंज़िल हो। हर तरफ ईमान रहे, फिर चैन-ओ-अमन शामिल हो, मात पर भी फक्र रहे, अब जीत कुछ यूँ हासिल हो। दुवाओं […]

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Shola Hoon

Shola Hoon

शोला हूँ भड़कने की गुजारिश नहीं करता, सच मुँह से निकल जाता हैं कोशिश नहीं करता । गिरती हुई दीवार का हम-दर्द हूँ लेकिन, चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता । माथे के पसीने की महक आये न जिस से, वो खून मेरे जिस्म में गर्दिश नहीं करता । हमदर्दी-ए-एहबाब से डरता हूँ ‘मुजफ्फर’, […]

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Suna Hain

Suna Hain

सुना हैं कि ज़ंजीरें चलती हैं ! हाँ ! किसी मासूम के गले से जेल के उस घर तक, जहाँ क़ानून के अँधेरे में उसकी बेगुनाही की वजह ढूँढती हैं । सुना हैं कि लकीरें जलती हैं ! हाँ ! किसी बदकिस्मत इंसान की दायीं हथेली पर, क़र्ज़ में डूबे किसी किसान की खेतों में […]

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Charaag Jalkar dhuaan

Charaag Jalkar dhuaan

चराग जलकर धुआँ खुद ही बना होगा, जो आरज़ू थी दिल की तो जला होगा ॥   मोड़ पे मोड़ छूटे होंगे जब चला होगा, जाने फिर कितने दफा बुझ के ये जला होगा ॥   न जाने राहों में ये कितनों से मिला होगा, पिन्हां नहीं यहाँ कुछ तन्हा ही चला होगा ॥   […]

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Ant

Ant

अन्त की भी क्या परिभाषा हैं, अन्त ही अन्त की आशा हैं ॥ तुम उससे भागो या उसके टुकड़े करो, तुम मानो अपना शत्रु या अंतर में भरो, अन्त नहीं कहता कि मैत्री नहीं तुमसे, कि अन्त अनीत हैं और तुम उससे लड़ो ॥ अन्त की भी क्या अभिलाषा हैं, अन्त ही अन्त की भाषा […]

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Phir Vikal Hain Pran Mere

Phir Vikal Hain Pran Mere

**—- छप्पन : यामा (महादेवी वर्मा) —-** फिर विकल हैं प्राण मेरे ! तोड़ दो यह क्षितिज मैं भी देख लूँ उस ओर क्या हैं ! जा रहे जिस पंथ से युग कल्प उसका छोर क्या हैं ? क्यों मुझे प्राचीर बन कर आज मेरे श्वास घेरे ? सिन्धु की निःसीमता पर लघु लहर का […]

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Ek Ho Prashn To Main Kah Deta

Ek Ho Prashn To Main Kah Deta

एक हो प्रश्न तो मैं कह देता, त्रास नहीं, मैं सब लिख देता ॥ तमस-पूर्ण नभ हैं तारापथ, पार्थ ! अब सूना हैं तेरा रथ, शिखा में तिरोहित शेष लिए, जो वीर कटे, भटके हैं किस पथ ॥ जब अनीत बहा तो कुरुक्षेत्र बना, भातृ-भुजा उठे, दम्भ नेत्र तना, क्या गुरु? क्या तात? क्या पितामह? […]

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