शायरीयों का समंदर

तुम उदास ना हुआ करो फूल मुरझा जाते हैं आंसू तुम पलकों पे ना रोका करो होंठ प्यासे रह जाते हैं

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इज़हारे मुहब्बत पे अजब हाल है उनका आँखें तो रज़ामंद हैं ,लब सोच रहे हैं |

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अपने गेसुओ के साए में गुलो की छाँव को दिल से बनाए रखना अमानत दी है मैंने तुझे तुम अपने दिल में दिल से संजोये रखना.

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दिल की तनहाइयों में हम उनको ढूंढते रहते हैं . दूर होकर भी जालिम आँखों के सामने घुमते रहते हैं

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ना सवाल बन के मिला करो ना जवाब बन के मिला करो मेरी जिंदगी मेरा ख्वाब है मुझे ख्वाब बन के मिला करो

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काश बनाने वाले ने दिल कांच के बनाये होते, तोड़ने वाले के हाथ में ज़ख्म तो आये होते

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तुमने मुड़कर भी नहीं देखा मुझे जाते जाते एक तकल्लुफ़ ही सही जिसको निभाते जाते क्या ख़ता थी के टूट गये हैं सब रिश्ते ये तो जाते हुए तुम मुझको बताते जाते ना इख़लास कोई ना ही शिकायत कोई कोई एहसान सही वो ही जताते जाते संभलना कैसे है मुझको तेरे जाने के बाद कम […]

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ड़ूबनेवाले को इक ही तिनके का सहारा काफ़ी है समझदार को कहते हैं बस एक इशारा काफ़ी है यूँ ही नहीं कहता हूँ मै के इश्क़ मोहब्बत धोखा है राह-ए-मोहब्बत पर मैने भी वक़्त गुज़ारा काफ़ी है क्या ग़म है जो मिला नहीं वो तुमने जिस को चाहा था दरिया-ए-ज़िंदगी में तो बस यादों का […]

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जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देखा है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी ही खबर भूले अपना घर जब से उसका घर देखा है फूलों में भी अब देखो इक नई सी रंगत आई है बागों ने भी शायद रूप-समंदर देखा है इश्क़ में चैन […]

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सफ़र में मुश्किलें आयें, तो जुर्रत और बढती है , कोई जब रास्ता रोके , तो हिम्मत और बढती है….

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पत्ती-पत्ती गुलाब क्या होगी, हर कली महज ख्वाब क्या होगी ! जिसने लाखों हसीं देखे हो, उसकी नियत ख़राब क्या होगी !!

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जब मेरे इश्क की इन्तेहा होगी, न कोई दूरी दरमियाँ होगी! तुम ही तुम होगी धड़कन मैं, तुम ही तुम बसोगी इन दिल-ओ-जान मैं!!

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सांसों मैं बसा कर रखना दिल के पिंजरे मैं पाल कर रखना टूटे दिल को सकूं देंगी ये यादें इन यादों को सदा सम्हाल कर रखना

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खुदा ने कहा दोस्ती न कर दोस्ती में तू कही खो जाएगा, मेने कहा हे खुदा तू आकेेे दोस्त से मिल तू भी उस पर फ़िदा हो जाएगा

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वो हमारा इमतिहान क्या लेगी मिलेगी नजरों से नजर तो नजर झुका लेगी उसे मेरी कब्र पर दिया जलाने को मत कहना वो नादान है दोस्तो अपना हाथ जला लेगी।

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तुम इतने समाए हो मुझमें कि ना जाने, कहाँ तक मैं और कहाँ तक तुम…! मेरी हर सोच पर, पहरा तुम्हारी आत्मीय बाँहों का.. तुम जो, लग जाते हो गले… तो मन हो जाता है मगन.. और लग जाती है अगन तुम छाए हो, मुझ पर इस कदर कि मैं…. ढूंढता हूँ खुद को तुम […]

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रात अभी तन्हाई की पहली दहलीज़ पे है और मेरी जानिब अपने हाथ बढ़ाती है सोच रहा हूँ इनको थामूँ ज़ीना-ज़ीना सन्नाटों के तहखानों में उतरूँ या अपने कमरों में ठहरूँ चाँद मिरी खिड़की पे दस्तक देता है

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अब जब नहीं हो तुम मेरे पास.. यूँ ही बीत जातें हैं ये दिन, बरसों हो गए, रूकती नहीं है, कभी ये काली स्याह रात …

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सबने कहा चाँद पर दाग हैं मैं नही माना इक तन्हा रात को मैं उससे पूछ बैठा की “ऐ चाँद क्या तुझ पर दाग हैं”   वो बोला ये दाग नही माँ का टिका हैं जो मुझेदुनिया की नज़र से बचाता हैं ,,, इंसान ईस बात को समझना नही चाहता उसे तो कमी निकालने की […]

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खाली है जिनका दामन वो हिसाब क्या देंगे सब सवाल ही गलत हैं फिर जवाब क्या देंगे हर तरफ़ हर जगह हर इक शरीक-ए-जुर्म है जो ख़ुद हैं बेपरदा तुम्हे नक़ाब क्या देंगे ख़ुद झूमते गिरते हुए जाते हैं महफ़िल से साक़ी ही हों नशे में तो शराब क्या देंगे जो आँख ही मिला नहीं […]

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